कुरान - 43:51 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

51
وَنَادَىٰ فِرۡعَوۡنُ فِي قَوۡمِهِۦ قَالَ يَٰقَوۡمِ أَلَيۡسَ لِي مُلۡكُ مِصۡرَ وَهَٰذِهِ ٱلۡأَنۡهَٰرُ تَجۡرِي مِن تَحۡتِيٓۚ أَفَلَا تُبۡصِرُونَ

Transliteration: (Wa naadaa Fir'awnu fee qawmihee qaala yaa qawmi alaisa lee mulku Misra wa haazihil anhaaru tajree min tahtee afalaa tubsiroon)

और फ़िरऔन ने अपनी क़ौम में मुनादी कराई, कहा: 'ऐ मेरी क़ौम! क्या मिस्र की बादशाही मेरी नहीं है [91] और ये नहरें [92] जो मेरे (महलों के) नीचे बह रही हैं? तो क्या तुम देखते नहीं हो?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 51 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 51

"और फ़िरऔन ने अपनी क़ौम में मुनादी कराई, कहा: 'ऐ मेरी क़ौम! क्या मिस्र की बादशाही मेरी नहीं है [91] और ये नहरें [92] जो मेरे (महलों के) नीचे बह रही हैं? तो क्या तुम देखते नहीं हो?'"

[91] मिस्र की हुकूमत पर फ़िरऔन का घमंड

फ़िरऔन ने अपनी दौलत, महलात और मिस्र की वसीअ सल्तनत पर तकब्बुर करते हुए लोगों को अपनी अज़मत का रौब दिखाया।

[92] दरिया-ए-नील की नहरों का फ़ख़्र

उसने दरिया-ए-नील की उन नहरों पर फ़ख़्र किया जो उसके महलों और बाग़ात के नीचे से बहती थीं, और इसी पानी के घमंड में आख़िरकार वह अपने तमाम लश्कर समेत उसी दरिया में ग़र्क़ कर दिया गया।

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