Transliteration: (Wa naadaa Fir'awnu fee qawmihee qaala yaa qawmi alaisa lee mulku Misra wa haazihil anhaaru tajree min tahtee afalaa tubsiroon)
"और फ़िरऔन ने अपनी क़ौम में मुनादी कराई, कहा: 'ऐ मेरी क़ौम! क्या मिस्र की बादशाही मेरी नहीं है [91] और ये नहरें [92] जो मेरे (महलों के) नीचे बह रही हैं? तो क्या तुम देखते नहीं हो?'"
फ़िरऔन ने अपनी दौलत, महलात और मिस्र की वसीअ सल्तनत पर तकब्बुर करते हुए लोगों को अपनी अज़मत का रौब दिखाया।
उसने दरिया-ए-नील की उन नहरों पर फ़ख़्र किया जो उसके महलों और बाग़ात के नीचे से बहती थीं, और इसी पानी के घमंड में आख़िरकार वह अपने तमाम लश्कर समेत उसी दरिया में ग़र्क़ कर दिया गया।
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