कुरान - 43:53 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

53
فَلَوۡلَآ أُلۡقِيَ عَلَيۡهِ أَسۡوِرَةٞ مِّن ذَهَبٍ أَوۡ جَآءَ مَعَهُ ٱلۡمَلَـٰٓئِكَةُ مُقۡتَرِنِينَ

Transliteration: (Falaw laa ulqiya 'alaihi aswiratun min zahabin aw jaaa'a ma'ahul malaaa'ikatu muqtarineen)

तो उस पर सोने के कंगन क्यों नहीं उतारे गए [95], या उसके साथ फ़रिश्ते क़तार बांध कर क्यों नहीं आए [96]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 53 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 53

"तो उस पर सोने के कंगन क्यों नहीं उतारे गए [95], या उसके साथ फ़रिश्ते क़तार बांध कर क्यों नहीं आए [96]?"

[95] सोने के कंगनों का जाहिलाना मुतालबा

मिस्र के दस्तूर के मुताबिक़ जब किसी को बड़ा ओहदा या वज़ारत दी जाती थी तो उसे सोने के कंगन पहनाए जाते थे। फ़िरऔन ने कहा कि अगर मूसा सच्चे रसूल हैं तो उनके पास सोने के कंगन क्यों नहीं हैं? यह उसकी माद्दा-परस्ताना और घटिया सोच थी।

[96] फ़रिश्तों की फ़ौज का मुतालबा

उसने यह भी कहा कि अगर वे सच्चे हैं तो फ़रिश्ते उनके साथ लश्कर की शक्ल में क्यों नहीं आए जो उनकी गवाही देते? उसने नबुव्वत की सच्चाई को दुनियावी तमाशे का नाम दे दिया।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now