कुरान - 43:55 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

55
فَلَمَّآ ءَاسَفُونَا ٱنتَقَمۡنَا مِنۡهُمۡ فَأَغۡرَقۡنَٰهُمۡ أَجۡمَعِينَ

Transliteration: (Falammaaa aasafoonan taqamnaa minhum fa aghraqnaahum ajma'een)

फिर जब उन्होंने हमें ग़ज़बनाक (नाराज़) कर दिया, तो हमने उनसे इंतिक़ाम ले लिया, पस हमने उन सबको ग़र्क़ (डूबो) दिया [98]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 55 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 55

"फिर जब उन्होंने हमें ग़ज़बनाक (नाराज़) कर दिया, तो हमने उनसे इंतिक़ाम ले लिया, पस हमने उन सबको ग़र्क़ (डूबो) दिया [98];"

[98] नबी की नाराज़गी अल्लाह की नाराज़गी है

इस आयत से यह अज़ीम अक़ीदा साबित हुआ कि नबी की नाराज़गी अल्लाह तआला की नाराज़गी है, और नबी को सताना अल्लाह के ग़ज़ब को दावत देना है। जब फ़िरऔनियों ने मूसा अलैहिस्सलाम को सताया तो अल्लाह ने उनसे इंतिक़ाम लिया और उन सबको दरिया-ए-नील की मौजों में ग़र्क़ कर दिया।

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