कुरान - 43:56 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

56
فَجَعَلۡنَٰهُمۡ سَلَفٗا وَمَثَلٗا لِّلۡأٓخِرِينَ

Transliteration: (Faja'alnaahum salafanw wa masalan lil aakhireen (section 5))

पस हमने उन्हें गुज़रे हुए लोगों की मिसाल और बाद में आने वालों के लिए इबरत बना दिया [99]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 56 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 56

"पस हमने उन्हें गुज़रे हुए लोगों की मिसाल और बाद में आने वालों के लिए इबरत बना दिया [99]!"

[99] आने वाली नस्लों के लिए इबरतनाक सबक़

फ़िरऔन और उसकी क़ौम का अंजाम क़यामत तक आने वाले तमाम सरकशों और ज़ालिमों के लिए इबरत का निशान बन गया। हर दौर के ज़ालिम को फ़िरऔन से तश्बीह दी जाती है। इससे मालूम हुआ कि बुराई के नतीजे में बदनामी होना भी इलाही अज़ाब की एक शक्ल है, जबकि नेकी और भलाई के साथ याद किया जाना अल्लाह की अज़ीम रहमत है।

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