Transliteration: (Wa qaalooo 'a-aalihatunaa khairun am hoo; maa daraboohu laka illaa jadalaa; balhum qawmun khasimoon)
"और कहने लगे: 'क्या हमारे माबूद बेहतर हैं या वह (ईसा) [101]?' उन्होंने यह मिसाल आपके सामने सिर्फ़ झगड़े (कज-बहसी) के लिए पेश की थी; बल्कि वे तो हैं ही झगड़ालू लोग [102]!"
काफ़िरों का यह कहना कि हमारे बुत बेहतर हैं या ईसा—सरासर बातिल था। क़ुरआन में जहां बुतों के जहन्नुम में जाने का ज़िक्र है वहां लफ़्ज़ 'मा' (مَا) इस्तेमाल हुआ है जो बेजान पत्थरों के लिए आता है, न कि अंबिया और फ़रिश्तों के लिए।
अरब के मुशरिक अरबी ज़बान के माहिर होने के बावजूद जान-बूझकर यह जानते थे कि अंबिया इस हुक्म से बरी हैं, लेकिन वे सिर्फ़ हुज़ूर ﷺ से झगड़ा करने और हक़ को उलझाने के लिए यह बेहूदा बातें बना रहे थे।
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