कुरान - 43:59 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

59
إِنۡ هُوَ إِلَّا عَبۡدٌ أَنۡعَمۡنَا عَلَيۡهِ وَجَعَلۡنَٰهُ مَثَلٗا لِّبَنِيٓ إِسۡرَـٰٓءِيلَ

Transliteration: (In huwa illaa 'abdun an'amnaa 'alaihi wa ja'alnaahu masalan li Baneee Israaa'eel)

वे तो बस हमारे एक बंदे थे जिन पर हमने एहसान (नबुव्वत) फ़रमाया [103] और हमने उन्हें बनी इसराईल के लिए एक अजीब निशानी बनाया [104]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 59 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 59

"वे तो बस हमारे एक बंदे थे जिन पर हमने एहसान (नबुव्वत) फ़रमाया [103] और हमने उन्हें बनी इसराईल के लिए एक अजीब निशानी बनाया [104];"

[103] हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम की खुदाई की तरदीद

हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम न ख़ुदा हैं और न ख़ुदा के बेटे। वे अल्लाह के मुक़र्रब और नेक बंदे और रसूल हैं जिन पर अल्लाह ने नबुव्वत, इंजील और मोजि़ज़ात का इनआम फ़रमाया। इस आयत ने ईसाइयों के अक़ीदा-ए-तस्लीस (तीन ख़ुदा) और यहूदियों के इन्कार दोनों को बातिल साबित कर दिया।

[104] क़ुदरत-ए-इलाही की अजीब निशानी

अल्लाह तआला ने अपनी कामिल क़ुदरत से हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम को बग़ैर बाप के पैदा फ़रमाया और उन्हें बनी इसराईल के लिए अपनी अज़ीम क़ुदरत का मुअजिज़ा और निशानी बना दिया।

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