Transliteration: (Wa law nashaaa'u laja'alnaa minkum malaaa'ikatan fil ardi yakhlufoon)
"और अगर हम चाहते, तो तुममें से फ़रिश्ते बना देते जो ज़मीन में तुम्हारे जानशीन होते [105]!"
अल्लाह तआला अगर चाहता तो इंसानों के बजाए ज़मीन पर फ़रिश्तों को आबाद कर देता जो मुकम्मल तौर पर उसकी इबादत करते और ज़मीन पर कोई गुनाह न होता। लेकिन अल्लाह की हिकमत यह थी कि इंसान को इख़्तियार और अक़्ल देकर इस दुनिया में आज़माइश के लिए भेजा जाए ताकि जो नेकी करे वह जन्नत का मुस्तहिक़ बने और जो नाफ़रमानी करे वह सज़ा पाए।
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