कुरान - 43:44 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

44
وَإِنَّهُۥ لَذِكۡرٞ لَّكَ وَلِقَوۡمِكَۖ وَسَوۡفَ تُسۡـَٔلُونَ

Transliteration: (Wa innahoo la zikrun laka wa liqawmika wa sawfa tus'aloon)

और बेशक यह (क़ुरआन) आपके लिए और आपकी क़ौम के लिए बहुत बड़ा शरफ़ (इज़्ज़त व ज़िक्र) है [76]; और अनक़रीब तुम सब से (इसके बारे में) सवाल पूछा जाएगा [77]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 44

"और बेशक यह (क़ुरआन) आपके लिए और आपकी क़ौम के लिए बहुत बड़ा शरफ़ (इज़्ज़त व ज़िक्र) है [76]; और अनक़रीब तुम सब से (इसके बारे में) सवाल पूछा जाएगा [77]!"

[76] क़ुरआन: हुज़ूर ﷺ और आपकी उम्मत का अज़ीम शरफ़

क़ुरआन-ए-अज़ीम हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की अज़ीम शान और आपकी क़ौम व उम्मत के लिए दो-जहां की इज़्ज़त व बुलंदी का ज़रिया है। इस किताब की बदौलत सहरा के बद्वियों को दुनिया की इमामत व रहनुमाई नसीब हुई।

[77] नेमत-ए-क़ुरआन की बाज़पुर्स

क़यामत के दिन सवाल होगा कि तुमने इस अज़ीम नेमत की क्या क़द्र की? क्या इस पर ईमान लाए और इसके अहकाम पर अमल किया, या इसे पीछे छोड़ दिया?

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