Transliteration: (Innal mujrimeena fee 'azaabi jahannama khaalidoon)
"बेशक मुजरिम लोग जहन्नुम के अज़ाब में हमेशा रहने वाले हैं [130]!"
यहाँ "मुजरिम" से मुराद ख़ास तौर पर काफ़िर और मुशरिक हैं। यह आयत साबित करती है कि जहन्नुम में हमेशा का रहना सिर्फ़ उन लोगों के लिए है जो कुफ़्र की हालत में मरे। गुनहगार मोमिनीन अपने गुनाहों की आरज़ी सज़ा भुगत कर या अल्लाह की रहमत और हुज़ूर ﷺ की शफ़ाअत से बिल-आख़िर जहन्नुम से निकाल लिए जाएंगे।
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