कुरान - 43:74 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

74
إِنَّ ٱلۡمُجۡرِمِينَ فِي عَذَابِ جَهَنَّمَ خَٰلِدُونَ

Transliteration: (Innal mujrimeena fee 'azaabi jahannama khaalidoon)

बेशक मुजरिम लोग जहन्नुम के अज़ाब में हमेशा रहने वाले हैं [130]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 74 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 74

"बेशक मुजरिम लोग जहन्नुम के अज़ाब में हमेशा रहने वाले हैं [130]!"

[130] काफ़िरों के लिए जहन्नुम का अबदी अज़ाब

यहाँ "मुजरिम" से मुराद ख़ास तौर पर काफ़िर और मुशरिक हैं। यह आयत साबित करती है कि जहन्नुम में हमेशा का रहना सिर्फ़ उन लोगों के लिए है जो कुफ़्र की हालत में मरे। गुनहगार मोमिनीन अपने गुनाहों की आरज़ी सज़ा भुगत कर या अल्लाह की रहमत और हुज़ूर ﷺ की शफ़ाअत से बिल-आख़िर जहन्नुम से निकाल लिए जाएंगे।

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