कुरान - 43:76 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

76
وَمَا ظَلَمۡنَٰهُمۡ وَلَٰكِن كَانُواْ هُمُ ٱلظَّـٰلِمِينَ

Transliteration: (Wa maa zalamnaahum wa laakin kaanoo humuz zaalimeen)

और हमने उन पर कोई ज़ुल्म नहीं किया, बल्कि वे ख़ुद ही ज़ालिम थे [133]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 76 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 76

"और हमने उन पर कोई ज़ुल्म नहीं किया, बल्कि वे ख़ुद ही ज़ालिम थे [133]!"

[133] इलाही अद्ल और बंदों का ज़ाती ज़ुल्म

अल्लाह तआला ज़ुल्म से पाक है। काफ़िरों को जो सज़ा दी जा रही है वह उनके अपने किए हुए कुफ़्र, सरकशी और नाफ़रमानियों का अद्ल भरा बदला है।

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