कुरान - 43:75 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

75
لَا يُفَتَّرُ عَنۡهُمۡ وَهُمۡ فِيهِ مُبۡلِسُونَ

Transliteration: (Laa yufattaru 'anhum wa hum feehi mublisoon)

उनसे अज़ाब कभी हल्का न किया जाएगा [131], और वे उसमें मायूस पड़े रहेंगे [132]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 75 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 75

"उनसे अज़ाब कभी हल्का न किया जाएगा [131], और वे उसमें मायूस पड़े रहेंगे [132]!"

[131] अज़ाब में कोई तख़्फ़ीफ़ नहीं

काफ़िरों के लिए जहन्नुम के अज़ाब में एक लम्हे के लिए भी कमी नहीं की जाएगी और न ही उनकी तकलीफ की शिद्दत घटेगी।

[132] मुकम्मल मायूसी

वे हर तरह की नजात और रहमत से पूरी तरह मायूस होंगे। इसके बरअक्स, गुनहगार मोमिन को अगर सज़ा मिले भी तो वह अल्लाह की रहमत से कभी मायूस नहीं होता।

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