कुरान - 43:77 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

77
وَنَادَوۡاْ يَٰمَٰلِكُ لِيَقۡضِ عَلَيۡنَا رَبُّكَۖ قَالَ إِنَّكُم مَّـٰكِثُونَ

Transliteration: (Wa naadaw yaa Maaliku liyaqdi 'alainaa Rabbuka qaala innakum maakithoon)

और वे पुकारेंगे: 'ऐ मालिक (दरोगा-ए-जहन्नुम)! तेरा रब हमारा काम ही तमाम कर दे [134]!' वह कहेगा: 'बेशक तुम्हें इसी में हमेशा रहना है [135]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 77 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 77

"और वे पुकारेंगे: 'ऐ मालिक (दरोगा-ए-जहन्नुम)! तेरा रब हमारा काम ही तमाम कर दे [134]!' वह कहेगा: 'बेशक तुम्हें इसी में हमेशा रहना है [135]!'"

[134] आख़िरत में वसीले का एतिराफ़

जहन्नुमी हज़रत मालिक (दरोगा-ए-जहन्नुम) को पुकार कर कहेंगे कि अपने रब से हमारे लिए मौत मांग दो ताकि अज़ाब से छूट जाएं। इससे साबित हुआ कि काफ़िर भी आख़िरत में मुक़र्रब फ़रिश्तों को वसीला बनाएंगे।

[135] जहन्नुम में हमेशा का क़ियाम

हज़रत मालिक जवाब देंगे कि अब न मौत आएगी और न अज़ाब ख़त्म होगा; तुम्हें हमेशा इसी अज़ाब में रहना है।

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