Transliteration: (Laqad ji'naakum bilhaqqi wa laakinna aksarakum lil haqqi kaarihoon)
"बेशक हम तुम्हारे पास हक़ (क़ुरआन) लेकर आए थे [136], लेकिन तुम में से अक्सर लोग हक़ से नफ़रत करने वाले थे [137]!"
अल्लाह तआला ने अपने रसूल ﷺ के ज़रिए बिल्कुल वाज़ेह और सच्चा क़ुरआन नाज़िल फ़रमाया जिसमें कोई शक नहीं था।
काफ़िरों की हलाकत की वजह यह थी कि वे हक़ से चिढ़ते थे और अपनी झूठी रस्मों और अना की वजह से सच्चाई को क़बूल करने से कतराते थे।
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