कुरान - 43:78 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

78
لَقَدۡ جِئۡنَٰكُم بِٱلۡحَقِّ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَكُمۡ لِلۡحَقِّ كَٰرِهُونَ

Transliteration: (Laqad ji'naakum bilhaqqi wa laakinna aksarakum lil haqqi kaarihoon)

बेशक हम तुम्हारे पास हक़ (क़ुरआन) लेकर आए थे [136], लेकिन तुम में से अक्सर लोग हक़ से नफ़रत करने वाले थे [137]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 78 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 78

"बेशक हम तुम्हारे पास हक़ (क़ुरआन) लेकर आए थे [136], लेकिन तुम में से अक्सर लोग हक़ से नफ़रत करने वाले थे [137]!"

[136] क़ुरआन हक़-ए-मुबीन है

अल्लाह तआला ने अपने रसूल ﷺ के ज़रिए बिल्कुल वाज़ेह और सच्चा क़ुरआन नाज़िल फ़रमाया जिसमें कोई शक नहीं था।

[137] हक़ से नफ़रत कुफ़्र का सबब

काफ़िरों की हलाकत की वजह यह थी कि वे हक़ से चिढ़ते थे और अपनी झूठी रस्मों और अना की वजह से सच्चाई को क़बूल करने से कतराते थे।

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