कुरान - 43:81 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

81
قُلۡ إِن كَانَ لِلرَّحۡمَٰنِ وَلَدٞ فَأَنَا۠ أَوَّلُ ٱلۡعَٰبِدِينَ

Transliteration: (Qul in kaana lir Rahmaani walad; fa-ana awwalul 'aabideen)

आप फ़रमा दीजिए: 'अगर रहमान की कोई औलाद (बेटा) होती, तो मैं सबसे पहले उसकी इबादत करता [141]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 81 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 81

"आप फ़रमा दीजिए: 'अगर रहमान की कोई औलाद (बेटा) होती, तो मैं सबसे पहले उसकी इबादत करता [141]!'"

[141] मुशरिकाना अक़ीदे का ज़बरदस्त इल्ज़ामी जवाब

यह आयत मुशरिकीन और ईसाईयों के औलाद के दावे का निहायत क़ातेअ जवाब है। मतलब यह है कि चूंकि मैं अल्लाह का सबसे सच्चा और फ़रमांबरदार बंदा हूं, अगर (फ़र्ज़े-मुहाल) उसकी कोई औलाद होती तो उसका हुक्म मानकर मैं सबसे पहले आगे बढ़ता। लेकिन चूंकि अल्लाह की न कोई औलाद है और न मुम्किन है, इसलिए किसी ग़ैर की इबादत करना सरासर बातिल और शिर्क है।

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