कुरान - 39:13 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

13
قُلۡ إِنِّيٓ أَخَافُ إِنۡ عَصَيۡتُ رَبِّي عَذَابَ يَوۡمٍ عَظِيمٖ

Transliteration: (Qul inneee akhaafu in 'asaitu Rabbee 'azaaba Yawmin 'azeem)

आप फ़रमा दीजिए: बेशक अगर मैं अपने रब की नाफ़रमानी करूँ, तो एक बड़े दिन के अज़ाब से डरता हूँ [42]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 13 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 13

"आप फ़रमा दीजिए: बेशक अगर मैं अपने रब की नाफ़रमानी करूँ, तो एक बड़े दिन के अज़ाब से डरता हूँ [42]!"

[42] उम्मत के लिए ख़ौफ़े ख़ुदा की तालीम

हुज़ूर ﷺ मासूम अनुल ख़ता होने के बावजूद अपनी आजिज़ाना बंदगी और उम्मत को तालीम देने के लिए ख़ौफ़े इलाही का इज़हार फ़रमाते हैं कि जब नबी की यह शान है, तो उम्मत को किस क़दर डरना चाहिए।

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