कुरान - 39:11 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
قُلۡ إِنِّيٓ أُمِرۡتُ أَنۡ أَعۡبُدَ ٱللَّهَ مُخۡلِصٗا لَّهُ ٱلدِّينَ

Transliteration: (Qul inneee umirtu an a'budal laaha mukhlisal lahud deen)

आप फ़रमा दीजिए: बेशक मुझे हुक्म दिया गया है [39] कि मैं अल्लाह की इबादत करूँ, अपनी इताअत को ख़ालिस उसी के लिए रखते हुए [40]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 11

"आप फ़रमा दीजिए: बेशक मुझे हुक्म दिया गया है [39] कि मैं अल्लाह की इबादत करूँ, अपनी इताअत को ख़ालिस उसी के लिए रखते हुए [40]!"

[39] सुन्नते नबवी के मुताबिक़ इबादत

हुज़ूर ﷺ को दिया गया हुक्म पूरी उम्मत के लिए है कि सच्ची इबादत वही है जो सुन्नते रसूल ﷺ के मुताबिक़ हो। नबी के वास्ते के बिना कोई अमल क़ाबिले क़बूल नहीं।

[40] इख़्लास का आला मक़ाम

इख़्लास का आला मक़ाम हुज़ूर ﷺ की मुहब्बत और इताअत ही के ज़रिए नसीब होता है।

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