Transliteration: (Qul inneee umirtu an a'budal laaha mukhlisal lahud deen)
"आप फ़रमा दीजिए: बेशक मुझे हुक्म दिया गया है [39] कि मैं अल्लाह की इबादत करूँ, अपनी इताअत को ख़ालिस उसी के लिए रखते हुए [40]!"
हुज़ूर ﷺ को दिया गया हुक्म पूरी उम्मत के लिए है कि सच्ची इबादत वही है जो सुन्नते रसूल ﷺ के मुताबिक़ हो। नबी के वास्ते के बिना कोई अमल क़ाबिले क़बूल नहीं।
इख़्लास का आला मक़ाम हुज़ूर ﷺ की मुहब्बत और इताअत ही के ज़रिए नसीब होता है।
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