कुरान - 39:10 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
قُلۡ يَٰعِبَادِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱتَّقُواْ رَبَّكُمۡۚ لِلَّذِينَ أَحۡسَنُواْ فِي هَٰذِهِ ٱلدُّنۡيَا حَسَنَةٞۗ وَأَرۡضُ ٱللَّهِ وَٰسِعَةٌۗ إِنَّمَا يُوَفَّى ٱلصَّـٰبِرُونَ أَجۡرَهُم بِغَيۡرِ حِسَابٖ

Transliteration: (Qul yaa 'ibaadil lazeena aamanut taqoo Rabbakum; lillazeena ahsanoo fee haazihid dunyaa hasanah; wa ardul laahi waasi'ah; innamaa yuwaffas saabiroona ajrahum bighayri hisab)

आप फ़रमा दीजिए: ऐ मेरे ईमान वाले बंदो! अपने रब से डरो [35]; उन लोगों के लिए जिन्होंने इस दुनिया में भलाई की, बेहतरीन भलाई है [36]; और अल्लाह की ज़मीन बहुत कुशादा है [37]; बेशक सब्र करने वालों को उनका बदला बे-हिसाब पूरा दिया जाएगा [38]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 10

"आप फ़रमा दीजिए: ऐ मेरे ईमान वाले बंदो! अपने रब से डरो [35]; उन लोगों के लिए जिन्होंने इस दुनिया में भलाई की, बेहतरीन भलाई है [36]; और अल्लाह की ज़मीन बहुत कुशादा है [37]; बेशक सब्र करने वालों को उनका बदला बे-हिसाब पूरा दिया जाएगा [38]!"

[35] तक़वे के मरातिब

ईमान के बाद तक़्वा आता है। अवाम, ख़्वास और अख़सुल ख़्वास हर तबक़े का तक़्वा उनके मर्तबे के मुताबिक़ होता है।

[36] दुनिया और आख़िरत की भलाई

नेकी करने वालों को दुनिया में सेहत, इज़्ज़त और रिज़्क़ की बरकत मिलती है और आख़िरत में जन्नत।

[37] हिजरत की इजाज़त

अगर किसी जगह दीन पर अमल करना मुहाल हो जाए, तो अल्लाह की कुशादा ज़मीन में हिजरत करना सुन्नते इलाही और बाइसे अज्र है।

[38] सब्र करने वालों का बे-हिसाब अज्र

यह आयत मुहाजिरीने हबशा (हज़रत जाफ़र तय्यार रदियल्लाहु अन्हु व दीगर सहाबा) के हक़ में नाज़िल हुई। हज़रत अली (रदियल्लाहु अन्हु) फ़रमाते हैं कि हर नेकी का वज़न तराज़ू में होगा, मगर सब्र का सवाब बिना किसी तराज़ू और शुमार के बे-हिसाब दिया जाएगा।

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