Transliteration: (Fa'budoo maa shi'tum min doonih; qul innal khaasireenal lazeena khasirooo anfusahum wa ahleehim yawmal qiyaamah; alaa zaalika huwal khusraanul mubeen)
"पस तुम उसके सिवा जिसकी चाहो पूजा करते रहो [43]; आप फ़रमा दीजिए: हक़ीक़ी घाटे वाले तो वही हैं जिन्होंने क़ियामत के दिन अपनी जानों को और अपने अहलो-अयाल को नुक़सान में डाल दिया; याद रखो कि यही खुला घाटा है [44]!"
यह शिर्क की इजाज़त नहीं बल्कि शदीद डांट और नाराज़गी का इज़हार है, जैसे बाप नाफ़रमान बेटे से कहे: "जा जो चाहे कर ले, अपना अंजाम ख़ुद देखेगा"।
सबसे बड़ा बदनसीब वह है जो ख़ुद भी गुमराह हुआ और अपने अहलो-अयाल को भी दोज़ख़ में झोंक दिया। इसके बरअक्स हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रदियल्लाहु अन्हु) की चार नस्लें सहाबी बनीं जो अज़ीम कामयाबी है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat