कुरान - 39:15 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

15
فَٱعۡبُدُواْ مَا شِئۡتُم مِّن دُونِهِۦۗ قُلۡ إِنَّ ٱلۡخَٰسِرِينَ ٱلَّذِينَ خَسِرُوٓاْ أَنفُسَهُمۡ وَأَهۡلِيهِمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِۗ أَلَا ذَٰلِكَ هُوَ ٱلۡخُسۡرَانُ ٱلۡمُبِينُ

Transliteration: (Fa'budoo maa shi'tum min doonih; qul innal khaasireenal lazeena khasirooo anfusahum wa ahleehim yawmal qiyaamah; alaa zaalika huwal khusraanul mubeen)

पस तुम उसके सिवा जिसकी चाहो पूजा करते रहो [43]; आप फ़रमा दीजिए: हक़ीक़ी घाटे वाले तो वही हैं जिन्होंने क़ियामत के दिन अपनी जानों को और अपने अहलो-अयाल को नुक़सान में डाल दिया; याद रखो कि यही खुला घाटा है [44]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 15 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 15

"पस तुम उसके सिवा जिसकी चाहो पूजा करते रहो [43]; आप फ़रमा दीजिए: हक़ीक़ी घाटे वाले तो वही हैं जिन्होंने क़ियामत के दिन अपनी जानों को और अपने अहलो-अयाल को नुक़सान में डाल दिया; याद रखो कि यही खुला घाटा है [44]!"

[43] सख़्त डांट और तंबीह

यह शिर्क की इजाज़त नहीं बल्कि शदीद डांट और नाराज़गी का इज़हार है, जैसे बाप नाफ़रमान बेटे से कहे: "जा जो चाहे कर ले, अपना अंजाम ख़ुद देखेगा"।

[44] हक़ीक़ी घाटा (ख़ुसरानुल मुबीन)

सबसे बड़ा बदनसीब वह है जो ख़ुद भी गुमराह हुआ और अपने अहलो-अयाल को भी दोज़ख़ में झोंक दिया। इसके बरअक्स हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रदियल्लाहु अन्हु) की चार नस्लें सहाबी बनीं जो अज़ीम कामयाबी है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now