कुरान - 39:17 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

17
وَٱلَّذِينَ ٱجۡتَنَبُواْ ٱلطَّـٰغُوتَ أَن يَعۡبُدُوهَا وَأَنَابُوٓاْ إِلَى ٱللَّهِ لَهُمُ ٱلۡبُشۡرَىٰۚ فَبَشِّرۡ عِبَادِ

Transliteration: (Wallazeenaj tanabut Taaghoota ai ya'budoohaa wa anaabooo ilal laahi lahumul bushraa; fabashshir 'ibaad)

और जिन लोगों ने ताग़ूत (बुतों व शैतान) की पूजा से अपने आपको बचाया [47] और अल्लाह की तरफ़ रुजूअ किया [48], उनके लिए बड़ी ख़ुशख़बरी है [49]; पस आप मेरे उन बंदों को बशारत दे दीजिए, (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 17 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 17

"और जिन लोगों ने ताग़ूत (बुतों व शैतान) की पूजा से अपने आपको बचाया [47] और अल्लाह की तरफ़ रुजूअ किया [48], उनके लिए बड़ी ख़ुशख़बरी है [49]; पस आप मेरे उन बंदों को बशारत दे दीजिए,"

[47] ताग़ूत से किनाराकशी

ताग़ूत हर उस चीज़ को कहते हैं जो सरकशी और गुमराही का सबब बने (शैतान, बुत और कुफ़्र के सरदार)। उनसे मुकम्मल बेज़ारी लाज़िम है।

[48] ख़ालिस रुजूअ

जब तक बातिल से दिल साफ़ न हो, अल्लाह की तरफ़ रुजूअ मुकम्मल नहीं होता; तौहीद और शिर्क एक दिल में जमा नहीं हो सकते।

[49] मुख़लिस मोमिनीन के लिए बशारत

अल्लाह ने अपने हबीब ﷺ को हुक्म दिया कि ऐसे बा-वफ़ा और मुख़लिस बंदों को मग़फ़िरत और जन्नत की ख़ुशख़बरी सुना दीजिए।

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