Transliteration: (Afaman haqqa 'alaihi kalimatul 'azaab; afa anta tunqizu man fin Naar)
"तो क्या वह शख़्स जिस पर अज़ाब का फ़रमान साबित हो चुका (क्या उसे कोई बचा सकता है)? तो क्या आप उस शख़्स को छुड़ा सकते हैं जो आग में है [53]?"
जिस काफ़िर पर कुफ़्र की वजह से अज़ाब साबित हो चुका, उसे मुकम्मल नजात नहीं मिल सकती। हाँ, हुज़ूर ﷺ की हिमायत के सबब अबू तालिब के अज़ाब में तख़्फ़ीफ़ ज़रूर हुई जैसा कि सहीह हदीस में है। कामिल नजात सिर्फ़ ईमान वालों के लिए मख़सूस है।
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