Transliteration: (Allazeena yastami'oonal qawla fayattabi'oona ahsanah; ulaaa'ikal lazeena hadaahumul laahu wa ulaaa'ika hum ulul albaab)
"जो बात को ग़ौर से सुनते हैं फिर उसके बेहतरीन पहलू की पैरवी करते हैं [50]; यही वे लोग हैं जिन्हें अल्लाह ने हिदायत अता फ़रमाई [51], और यही हक़ीक़त में अक़्ल वाले हैं [52]!"
हुज़ूर ﷺ के तमाम इरशादात बेहतरीन हैं। अहले ईमान अपने हालात के मुताबिक़ अफ़ज़ल अमल को इख़्तियार करते हैं (मालदार ज़कात देते हैं, मुजाहिद जिहाद करते हैं, उलमा इल्म फैलाते हैं)।
यह आयत हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रदियल्लाहु अन्हु) की दावत पर ईमान लाने वाले अज़ीम सहाबा—हज़रत उस्मान, हज़रत अब्दुर रहमान बिन औफ़, हज़रत तल्हा, हज़रत ज़ुबैर, हज़रत साअद और हज़रत सईद बिन ज़ैद (रदियल्लाहु अन्हुम)—के हक़ में नाज़िल हुई।
सच्ची अक़्ल वह है जो इन्सान को अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के फ़रमान पर चलने की तौफ़ीक़ दे।
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