Transliteration: (Lahum min fawqihim zulalum minan Naari wa min tahtihim zulal; zaalika yukhaw wiful laahu bihee 'ibaadah; yaa 'ibaadi fattaqoon)
"उनके ऊपर से भी आग के साएबान (तहें) होंगे और उनके नीचे से भी आग की तहें होंगी [45]; यह वह है जिससे अल्लाह अपने बंदों को डराता है: ऐ मेरे बंदो! पस मुझी से डरो [46]!"
दोज़ख़ियों को ऊपर, नीचे और हर सिम्त से आग की तहें ढाँप लेंगी (सूरह अल-अंकबूत: 55), जिससे बचने की कोई राह न होगी।
अल्लाह का ख़ौफ़ वह है जो इंसान को गुनाहों से रोक कर इताअत की तरफ़ लाए। शैतान भी डरने का दावा करता था मगर इताअत न होने की वजह से मरदूद हुआ।
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