Transliteration: (Alam tara annal laaha anzala minas samaaa'i maaa'an fasalakahoo yanaabee'a fil ardi summa yukhriju bihee zar'am mukhtalifan alwaanuhoo summa yaheeju fatarahu musfarran summa yaj'aluhoo hutaamaa; inna fee zaalika lazikraa li ulil albaab (section 2))
"क्या आपने नहीं देखा कि अल्लाह ने आसमान से पानी उतारा [56], फिर उसे ज़मीन में सोतों (चश्मों) की शक्ल में बहाया [57], फिर उसके ज़रिए तरह-तरह के रंगों वाली खेती निकालता है [58], फिर वह सूख जाती है तो आप उसे ज़र्द देखते हैं, फिर वह उसे रेज़ा-रेज़ा (भूसा) कर देता है [59]? बेशक इसमें अक़्ल वालों के लिए बड़ी नसीहत है [60]!"
अल्लाह आसमान से पानी बरसाता है जो तमाम मख़्लूक़ात की ज़िन्दगी का ज़रिया है।
बारिश का पानी ज़मीन में जज़्ब होकर चश्मों और कुओं की शक्ल में फूटता है।
एक ही पानी से तरह-तरह के रंग, ज़ायके और फ़ायदे की फ़सलें उगती हैं जो क़ुदरते इलाही की निसानी हैं।
सब्ज़ खेती ज़र्द होकर भूसा बन जाती है, जो दुनियावी ज़िन्दगी के फ़ना होने की खुली मिसाल है।
दुनिया की चमक-दमक फ़ानी है, इन्सान को आख़िरत की तय्यारी करनी चाहिए।
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