Transliteration: (Allahu nazzala ahsanal hadeesi Kitaabam mutashaa biham masaaniy taqsha'irru minhu juloodul lazeena yakhshawna Rabbahum summa taleenu julooduhum wa quloo buhum ilaa zikril laah; zaalika hudal laahi yahdee bihee mai yashaaa'; wa mai yudlilil laahu famaa lahoo min haad)
"अल्लाह ने सबसे बेहतरीन किताब नाज़िल फ़रमाई, जो शुरू से आख़िर तक एक जैसी है, बार-बार दोहराई जाने वाली [65], जिससे उन लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं जो अपने रब से डरते हैं [66], फिर उनकी खालें और उनके दिल अल्लाह के ज़िक्र की तरफ़ नर्म होकर झुक जाते हैं; यह अल्लाह की हिदायत है, वह इसके ज़रिए जिसे चाहता है हिदायत अता फ़रमाता है [67]; और जिसे अल्लाह गुमराह छोड़ दे [68], तो उसे कोई रास्ता दिखाने वाला नहीं।"
क़ुरआने मजीद सबसे बेहतरीन, मुअज्ज़ज़ और बा-असर किताब है जिसमें नेमतों के वादे और अज़ाब की तंबीहात बार-बार दोहराई गई हैं।
क़ुरआन की तिलावत से औलिया-ए-किराम के रोंगटे खड़े हो जाते हैं और फिर अल्लाह की रहमत की उम्मीद में दिल पुर-सुकून हो जाते हैं।
अल्लाह अपने फ़ज़्ल से जिसे चाहता है क़ुरआन के ज़रिए सीधे रास्ते की हिदायत बख़्शता है।
जो अपनी बद-आमाली से हक़ को ठुकराए, अल्लाह उसे गुमराह छोड़ देता है और कोई उसे हिदायत नहीं दे सकता।
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