कुरान - 39:23 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

23
ٱللَّهُ نَزَّلَ أَحۡسَنَ ٱلۡحَدِيثِ كِتَٰبٗا مُّتَشَٰبِهٗا مَّثَانِيَ تَقۡشَعِرُّ مِنۡهُ جُلُودُ ٱلَّذِينَ يَخۡشَوۡنَ رَبَّهُمۡ ثُمَّ تَلِينُ جُلُودُهُمۡ وَقُلُوبُهُمۡ إِلَىٰ ذِكۡرِ ٱللَّهِۚ ذَٰلِكَ هُدَى ٱللَّهِ يَهۡدِي بِهِۦ مَن يَشَآءُۚ وَمَن يُضۡلِلِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِنۡ هَادٍ

Transliteration: (Allahu nazzala ahsanal hadeesi Kitaabam mutashaa biham masaaniy taqsha'irru minhu juloodul lazeena yakhshawna Rabbahum summa taleenu julooduhum wa quloo buhum ilaa zikril laah; zaalika hudal laahi yahdee bihee mai yashaaa'; wa mai yudlilil laahu famaa lahoo min haad)

अल्लाह ने सबसे बेहतरीन किताब नाज़िल फ़रमाई, जो शुरू से आख़िर तक एक जैसी है, बार-बार दोहराई जाने वाली [65], जिससे उन लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं जो अपने रब से डरते हैं [66], फिर उनकी खालें और उनके दिल अल्लाह के ज़िक्र की तरफ़ नर्म होकर झुक जाते हैं; यह अल्लाह की हिदायत है, वह इसके ज़रिए जिसे चाहता है हिदायत अता फ़रमाता है [67]; और जिसे अल्लाह गुमराह छोड़ दे [68], तो उसे कोई रास्ता दिखाने वाला नहीं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 23 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 23

"अल्लाह ने सबसे बेहतरीन किताब नाज़िल फ़रमाई, जो शुरू से आख़िर तक एक जैसी है, बार-बार दोहराई जाने वाली [65], जिससे उन लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं जो अपने रब से डरते हैं [66], फिर उनकी खालें और उनके दिल अल्लाह के ज़िक्र की तरफ़ नर्म होकर झुक जाते हैं; यह अल्लाह की हिदायत है, वह इसके ज़रिए जिसे चाहता है हिदायत अता फ़रमाता है [67]; और जिसे अल्लाह गुमराह छोड़ दे [68], तो उसे कोई रास्ता दिखाने वाला नहीं।"

[65] अहसनुल हदीस - मुकम्मल कलाम

क़ुरआने मजीद सबसे बेहतरीन, मुअज्ज़ज़ और बा-असर किताब है जिसमें नेमतों के वादे और अज़ाब की तंबीहात बार-बार दोहराई गई हैं।

[66] ख़ौफ़ व रहमत का रूहानी असर

क़ुरआन की तिलावत से औलिया-ए-किराम के रोंगटे खड़े हो जाते हैं और फिर अल्लाह की रहमत की उम्मीद में दिल पुर-सुकून हो जाते हैं।

[67] हिदायते इलाही

अल्लाह अपने फ़ज़्ल से जिसे चाहता है क़ुरआन के ज़रिए सीधे रास्ते की हिदायत बख़्शता है।

[68] बद-अमलों की गुमराही

जो अपनी बद-आमाली से हक़ को ठुकराए, अल्लाह उसे गुमराह छोड़ देता है और कोई उसे हिदायत नहीं दे सकता।

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