कुरान - 39:24 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

24
أَفَمَن يَتَّقِي بِوَجۡهِهِۦ سُوٓءَ ٱلۡعَذَابِ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِۚ وَقِيلَ لِلظَّـٰلِمِينَ ذُوقُواْ مَا كُنتُمۡ تَكۡسِبُونَ

Transliteration: (Afamai yattaqee biwaj hihee sooo'al 'azaabi Yawmal Qiyaamah; wa qeela lizzaali meena zooqoo maa kuntum taksiboon)

तो क्या वह शख़्स जो क़ियामत के दिन अपने चेहरे को बड़े अज़ाब की ढाल बनाएगा [69] (वह महफ़ूज़ रहने वाले जैसा हो सकता है?) और ज़ालिमों से कहा जाएगा: चखो मज़ा उस (गुनाह) का जो तुम कमाते थे [70]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 24 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 24

"तो क्या वह शख़्स जो क़ियामत के दिन अपने चेहरे को बड़े अज़ाब की ढाल बनाएगा [69] (वह महफ़ूज़ रहने वाले जैसा हो सकता है?) और ज़ालिमों से कहा जाएगा: चखो मज़ा उस (गुनाह) का जो तुम कमाते थे [70]!"

[69] चेहरे के बल अज़ाब में ढकेला जाना

हाथ बंधे होने की वजह से दोज़ख़ी आग से बचने के लिए अपने चेहरे को आगे करेगा जो इंसान का सबसे मुकर्रम उज़्व है।

[70] कमाई का अज़ाब

ज़ालिमों से कहा जाएगा कि यह तुम्हारे अपने कुफ़्र और गुनाहों का बदला है जो आग की सूरत में तुम्हें घेरे हुए है।

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