कुरान - 39:26 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
فَأَذَاقَهُمُ ٱللَّهُ ٱلۡخِزۡيَ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَاۖ وَلَعَذَابُ ٱلۡأٓخِرَةِ أَكۡبَرُۚ لَوۡ كَانُواْ يَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Fa azaaqahumul laahul khizya fil hayaatid dunyaa wa la'azaabul Aakhirati akbar; law kaanoo ya'lamoon)

तो अल्लाह ने उन्हें इस दुनिया के जीवन में रुसवाई का मज़ा चखाया [72], और आख़िरत का अज़ाब तो सबसे बड़ा है [73], क्या ही अच्छा होता अगर वे जानते! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 26

"तो अल्लाह ने उन्हें इस दुनिया के जीवन में रुसवाई का मज़ा चखाया [72], और आख़िरत का अज़ाब तो सबसे बड़ा है [73], क्या ही अच्छा होता अगर वे जानते!"

[72] दुनियावी रुसवाई और अज़ाब

उनके लगातार इनकार, हठधर्मी और सरकशी के सबब अल्लाह तआला ने उन्हें इसी दुनिया की ज़िंदगी में ज़िल्लत, रुसवाई और अज़ाब का मज़ा चखाया। किसी की सूरतें जानवरों में बदल दी गईं, किसी को ज़मीन में धंसा दिया गया, किसी पर पत्थरों की बारिश हुई और किसी को तूफ़ान व ग़र्क़ाब से हलाक कर दिया गया।

ये दुनियावी अज़ाब बाद में आने वालों के लिए इबरत व नसीहत का ज़रिया बने, मगर ज़ालिमों ने इनसे भी सबक़ न लिया।

[73] आख़िरत का अज़ाब सबसे बड़ा

दुनियावी अज़ाब आख़िरत के दायमी और शदीद अज़ाब के मुक़ाबले में निहायत मामूली है। अगर किसी मुजरिम या काफ़िर को दुनिया में सज़ा मिल भी जाए, तो इससे आख़िरत के अज़ाब में कोई कमी नहीं आती। दोनों अज़ाब अपनी-अपनी जगह मुस्तक़िल हैं।

काश कि वे जानते: अगर वे इस हक़ीक़त को जान लेते और समझ लेते, तो कुफ़्र व नाफ़रमानी से बाज़ आ जाते और तौबा कर लेते।

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