Transliteration: (Fa azaaqahumul laahul khizya fil hayaatid dunyaa wa la'azaabul Aakhirati akbar; law kaanoo ya'lamoon)
"तो अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ इस दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के जीवन में रà¥à¤¸à¤µà¤¾à¤ˆ का मज़ा चखाया [72], और आख़िरत का अज़ाब तो सबसे बड़ा है [73], कà¥à¤¯à¤¾ ही अचà¥à¤›à¤¾ होता अगर वे जानते!"
उनके लगातार इनकार, हठधरà¥à¤®à¥€ और सरकशी के सबब अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ इसी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की ज़िंदगी में ज़िलà¥à¤²à¤¤, रà¥à¤¸à¤µà¤¾à¤ˆ और अज़ाब का मज़ा चखाया। किसी की सूरतें जानवरों में बदल दी गईं, किसी को ज़मीन में धंसा दिया गया, किसी पर पतà¥à¤¥à¤°à¥‹à¤‚ की बारिश हà¥à¤ˆ और किसी को तूफ़ान व ग़रà¥à¤•़ाब से हलाक कर दिया गया।
ये दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤µà¥€ अज़ाब बाद में आने वालों के लिठइबरत व नसीहत का ज़रिया बने, मगर ज़ालिमों ने इनसे à¤à¥€ सबक़ न लिया।
दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤µà¥€ अज़ाब आख़िरत के दायमी और शदीद अज़ाब के मà¥à¤•़ाबले में निहायत मामूली है। अगर किसी मà¥à¤œà¤°à¤¿à¤® या काफ़िर को दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में सज़ा मिल à¤à¥€ जाà¤, तो इससे आख़िरत के अज़ाब में कोई कमी नहीं आती। दोनों अज़ाब अपनी-अपनी जगह मà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•़िल हैं।
काश कि वे जानते: अगर वे इस हक़ीक़त को जान लेते और समठलेते, तो कà¥à¤«à¤¼à¥à¤° व नाफ़रमानी से बाज़ आ जाते और तौबा कर लेते।
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