कुरान - 39:28 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

28
قُرۡءَانًا عَرَبِيًّا غَيۡرَ ذِي عِوَجٖ لَّعَلَّهُمۡ يَتَّقُونَ

Transliteration: (Qur-aanan 'Arabiyyan ghaira zee 'iwajil la'allahum yattaqoon)

अरबी ज़बान का क़ुरआन [75], जिसमें कोई टेढ़ (कमी या त्रुटि) नहीं [76], ताकि वे परहेज़गार बन जाएं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 28 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 28

"अरबी ज़बान का क़ुरआन [75], जिसमें कोई टेढ़ (कमी या त्रुटि) नहीं [76], ताकि वे परहेज़गार बन जाएं।"

[75] अरबी ज़बान में नुज़ूल की हिकमत

क़ुरआन मजीद को अरबी ज़बान में नाज़िल किया गया जो फ़साहत, बलाग़त और मानी के ऐतबार से दुनिया की सबसे मुकम्मल और वसीअ ज़बान है। क़ुरआन का असल ए'जाज़ उसके अरबी अल्फ़ाज़ और तरकीब में है। किसी तर्जुमे को असल क़ुरआन नहीं कहा जा सकता, और न ही मख़ारिज की अदायगी के बग़ैर सही तिलावत मुमकिन है।

[76] हर ऐब व तज़ाद से पाक

इस मुबारक कलाम में न कोई तज़ाद है, न लफ़्ज़ी या मानवी ख़ामी, और न ही हक़ीक़त से कोई इनहिराफ़। इसके तमाम अहकाम, ख़ुशख़बरियां और वईदें हक़ व इंसाफ़ पर मब्नी हैं। इसका मक़सद यही है कि बंदे अल्लाह तआला के अज़ाब से डरें और तक़्वा व परहेज़गारी की राह अपनाएं।

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