कुरान - 39:29 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

29
ضَرَبَ ٱللَّهُ مَثَلٗا رَّجُلٗا فِيهِ شُرَكَآءُ مُتَشَٰكِسُونَ وَرَجُلٗا سَلَمٗا لِّرَجُلٍ هَلۡ يَسۡتَوِيَانِ مَثَلًاۚ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِۚ بَلۡ أَكۡثَرُهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Darabal laahu masalar rajulan feehi shurakaaa'u mutashaakisoona wa rajulan salamal lirajulin hal yastawi yaani masalaa; alhamdu lillaah; bal aksaruhum laa ya'lamoon)

अल्लाह एक मिसाल बयान फ़रमाता है: एक ग़ुलाम जिसमें कई बदख़ू शरीक आपस में झगड़ते हैं, और एक वह ग़ुलाम जो ख़ालिस एक ही आक़ा का है; क्या उन दोनों का हाल बराबर है [77]? सब तारीफ़ अल्लाह ही के लिए है, बल्कि उनमें से अक्सर बेख़बर हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 29 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 29

"अल्लाह एक मिसाल बयान फ़रमाता है: एक ग़ुलाम जिसमें कई बदख़ू शरीक आपस में झगड़ते हैं, और एक वह ग़ुलाम जो ख़ालिस एक ही आक़ा का है; क्या उन दोनों का हाल बराबर है [77]? सब तारीफ़ अल्लाह ही के लिए है, बल्कि उनमें से अक्सर बेख़बर हैं।"

[77] तौहीद और शिर्क की रोशन मिसाल

यह मिसाल तौहीद (एकेश्वरवाद) की बरकत और शिर्क (बहुदेववाद) की ख़राबी को वाज़ेह करने के लिए बयान की गई है:

  • मुशरिक का हाल: उस ग़ुलाम की तरह है जिसके कई मालिक हों, जो आपस में बद-मिज़ाज और मुख़्तलिफ़ ख़्यालात के हों। एक कुछ हुक्म देता है, दूसरा उसका उलट चाहता है। वह ग़ुलाम हमेशा परेशानी, उलझन और ख़ौफ़ में मुब्तला रहता है।
  • मोमिन मुवह़्हिद का हाल: उस ग़ुलाम की मानिंद है जिसका सिर्फ़ एक ही मेहरबान और मुंसिफ़ आक़ा हो। उसे मालूम है कि किसकी फ़रमांबरदारी करनी है और किस एक को राज़ी रखना है, जिससे उसे सुकून, यकसूई और इतमीनान नसीब होता है।

अल्लाह ही के लिए सब तारीफ़ है जिसने तौहीद की हक़ीक़त को इतना वाज़ेह कर दिया, मगर अफ़सोस कि अक्सर मुशरिक इस बात को नहीं समझते।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now