कुरान - 39:30 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

30
إِنَّكَ مَيِّتٞ وَإِنَّهُم مَّيِّتُونَ

Transliteration: (Innaka maiyitunw wa inna hum maiyitoon)

बेशक आपको भी विसाल फ़रमाना है [78] और उन सबको भी मरना है [79] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 30

"बेशक आपको भी विसाल फ़रमाना है [78] और उन सबको भी मरना है [79] ।"

[78] हुज़ूर अक़दस ﷺ का विसाल-ए-हक़ीक़ी

यहाँ हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को मुख़ातब करके फ़रमाया गया कि ज़ाहिरी दुनियावी हयात का पर्दा उठेगा और आप अपने रब के विसाल से मुशर्रफ़ होंगे। अंबिया-ए-किराम अलैहिमुस्सलाम की मौत सिर्फ़ एक आन (लम्हे) के लिए ज़ाइक़ा चखने की हद तक होती है, जिसके बाद उन्हें अपनी क़ब्रों में हयात-ए-हक़ीक़िया अता होती है। जैसा कि हदीस शरीफ़ में फ़रमाया गया: "अंबिया अपनी क़ब्रों में ज़िंदा हैं और नमाज़ें पढ़ते हैं।"

[79] आम मख़लूक़ और काफ़िरों की मौत

काफ़िरों और आम इंसानों की मौत रूह के जिस्मानी तअल्लुक़ के मुनक़ता होने और उनके आमालनामे के बंद होने की सूरत में होती है। अंबिया-ए-किराम की मुबारक रूहें जिस्म से जुदा होकर भी अपने जिस्मों और उम्मत के अहवाल से मुकम्मल बाख़बर और मुत्तसिल रहती हैं, उनके मुक़द्दस जिस्मों को ज़मीन का खाना हराम कर दिया गया है।

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