कुरान - 39:32 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

32
۞فَمَنۡ أَظۡلَمُ مِمَّن كَذَبَ عَلَى ٱللَّهِ وَكَذَّبَ بِٱلصِّدۡقِ إِذۡ جَآءَهُۥٓۚ أَلَيۡسَ فِي جَهَنَّمَ مَثۡوٗى لِّلۡكَٰفِرِينَ

Transliteration: (Faman azlamu mimman kazaba 'alal laahi wa kazzaba bissidqi iz jaaa'ah; alaisa fee Jahannama maswal lilkaafireen)

तो उससे बड़ा ज़ालिम कौन जो अल्लाह पर झूठ बोले [81] और सच को झुठलाए [82] जब वह उसके पास आए? क्या काफ़िरों का ठिकाना जहन्नम में नहीं है [83]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 32 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 32

"तो उससे बड़ा ज़ालिम कौन जो अल्लाह पर झूठ बोले [81] और सच को झुठलाए [82] जब वह उसके पास आए? क्या काफ़िरों का ठिकाना जहन्नम में नहीं है [83]?"

[81] अल्लाह पर बोहतान तराशना

अल्लाह तआला की ज़ात व सिफ़ात में शरीक ठहराना, उसके लिए औलाद तसलीम करना, या यह कहना कि उसने फ़ुलां शिर्क या गुनाह का हुक्म दिया है—यह अल्लाह पर सबसे बड़ा झूठ और बोहतान है। अक़ीदे का बिगाड़ सबसे बड़ा ज़ुल्म है।

[82] सिद्क़ (सच्चाई) को झुठलाना

सिद्क़ (सच्चाई) से मुराद क़ुरआन-ए-मजीद है जो सरापा हक़ है, या हुज़ूर सैयदे आलम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की ज़ात-ए-मुबारक है जो मुजस्सम सच्चाई हैं। जो शख़्स ऐसे रोशन दलाइल और मुअज्ज़ज़ रसूल को देखकर भी तकब्बुर से झुठलाए, उससे बढ़कर ज़ालिम कौन हो सकता है?

[83] काफ़िरों का हमेशा का ठिकाना जहन्नम

जहन्नम काफ़िरों और मुशरिकों का दायमी और मुस्तक़िल ठिकाना है। गुनाहगार मोमिनीन अगर जहन्नम में गए भी, तो अपनी सज़ा भुगतकर या नबी करीम ﷺ की शफ़ाअत से निकाल लिए जाएंगे, मगर काफ़िर हमेशा-हमेशा उसी में जलेंगे।

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