कुरान - 39:33 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

33
وَٱلَّذِي جَآءَ بِٱلصِّدۡقِ وَصَدَّقَ بِهِۦٓ أُوْلَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡمُتَّقُونَ

Transliteration: (Wallazee jaaa'a bissidqi wa saddaqa biheee ulaaa'ika humul muttaqoon)

और वह जो सच लेकर तशरीफ़ लाए और जिन्होंने उसकी तस्दीक़ की, वही लोग परहेज़गार हैं [84] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 33 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 33

"और वह जो सच लेकर तशरीफ़ लाए और जिन्होंने उसकी तस्दीक़ की, वही लोग परहेज़गार हैं [84] ।"

[84] सच लाने वाले और तस्दीक़ करने वाले

मुफ़स्सिरीन-ए-किराम फ़रमाते हैं कि सच लेकर आने वाले से मुराद हुज़ूर सरवर-ए-कायनात सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं जो हक़, तौहीद और क़ुरआन लेकर तशरीफ़ लाए।

और दिल व जान से बिना किसी तरद्दुद के सबसे पहले तस्दीक़ करने वाले हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु हैं, जिन्होंने मेराज और हर पैग़ाम-ए-हक़ की ऐसी अज़ीम तस्दीक़ फ़रमाई कि 'सिद्दीक़' के लक़ब से नवाज़े गए।

यह आयत हुज़ूर ﷺ की नबुव्वत और हज़रत सिद्दीक़-ए-अकबर रज़ियल्लाहु अन्हु की बेमिसाल फ़ज़ीलत व सिद्दीक़ियत की वाज़ेह सनद है।

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