कुरान - 39:31 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
ثُمَّ إِنَّكُمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ عِندَ رَبِّكُمۡ تَخۡتَصِمُونَ

Transliteration: (Summa innakum Yawmal Qiyaamati 'inda Rabbikum takhtasimoon (section 3) (End Juz 23))

फिर तुम सब क़ियामत के दिन अपने रब के हुज़ूर झगड़ोगे (बहस व मुक़द्दमा पेश करोगे) [80] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 31

"फिर तुम सब क़ियामत के दिन अपने रब के हुज़ूर झगड़ोगे (बहस व मुक़द्दमा पेश करोगे) [80] ।"

[80] बारगाह-ए-इलाही में क़ियामत की पेशी व फ़ैसला

क़ियामत के अज़ीम दिन तमाम मख़लूक़ अल्लाह तआला की बारगाह में जमा होगी। हक़ और बातिल, ज़ालिम और मज़लूम, नबी और उनकी उम्मतें सबके मुक़द्दमात पेश होंगे:

  • अंबिया-ए-किराम गवाही देंगे कि उन्होंने अल्लाह का पैग़ाम पूरी अमानत व सच्चाई से पहुँचा दिया था।
  • काफ़िर और मुनकिर अपनी नाफ़रमानी के बहाने तलाश करेंगे और बातिल दलीलें गढ़ेंगे।
  • हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और आपकी उम्मत पिछले अंबिया की तस्दीक़ में गवाही देगी।

अल्लाह तआला अपनी कामिल अदालत में हक़ का फ़ैसला फ़रमाएगा, हुज़ूर ﷺ की शफ़ाअत ज़ाहिर होगी और मुनकिरीन को उनके किए की पूरी सज़ा दी जाएगी।

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