कुरान - 39:27 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

27
وَلَقَدۡ ضَرَبۡنَا لِلنَّاسِ فِي هَٰذَا ٱلۡقُرۡءَانِ مِن كُلِّ مَثَلٖ لَّعَلَّهُمۡ يَتَذَكَّرُونَ

Transliteration: (Wa laqad darabnaa linnaasi fee haazal Qur-aani min kulli masalil la'allahum yatazakkaroon)

और बेशक हमने लोगों के लिए इस क़ुरआन में हर क़िस्म की मिसालें बयान फ़रमाईं ताकि वे नसीहत हासिल करें [74]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 27 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 27

"और बेशक हमने लोगों के लिए इस क़ुरआन में हर क़िस्म की मिसालें बयान फ़रमाईं ताकि वे नसीहत हासिल करें [74]।"

[74] क़ुरआन: हिदायत का कामिल दस्तूर

क़ुरआन-ए-करीम की यह शान है कि अल्लाह तआला ने इंसानों की रहनुमाई के लिए इसमें हर तरह की मिसालें, दलाइल, वाक़िआत, वा'दे और वईदें निहायत वाज़ेह अंदाज़ में बयान फ़रमाई हैं।

चूंकि इंसानों की तबीअतें और समझ-बूझ मुख़्तलिफ़ होती हैं—कोई अक़ली दलाइल से समझता है, कोई ख़ौफ़ व इबरत से राह पर आता है, और कोई बशारत व मुहब्बत से मुतास्सिर होता है—इस मुबारक किताब में हर दिल और ज़ेहन के लिए मुकम्मल हिदायत रखी गई है ताकि लोग ग़फ़लत से बेदार हों और अपनी इस्लाह करें।

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