कुरान - 39:22 सूरह अज़-ज़ुमर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

22
أَفَمَن شَرَحَ ٱللَّهُ صَدۡرَهُۥ لِلۡإِسۡلَٰمِ فَهُوَ عَلَىٰ نُورٖ مِّن رَّبِّهِۦۚ فَوَيۡلٞ لِّلۡقَٰسِيَةِ قُلُوبُهُم مِّن ذِكۡرِ ٱللَّهِۚ أُوْلَـٰٓئِكَ فِي ضَلَٰلٖ مُّبِينٍ

Transliteration: (Afaman sharahal laahu sadrahoo lil Islaami fahuwa 'alaa noorim mir Rabbih; fa wailul lilqaasiyati quloobuhum min zikril laah; ulaaa'ika fee dalaalim mubeen)

तो क्या वह शख़्स जिसका सीना अल्लाह ने इस्लाम के लिए खोल दिया [61], पस वह अपने रब की तरफ़ से एक नूर (रौशनी) पर है [62] (क्या वह संगदिल जैसा है?) पस ख़राबी है उन लोगों के लिए जिनके दिल अल्लाह के ज़िक्र से सख़्त हो चुके हैं [63] [64]! वे खुली गुमराही में हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुमर आयत 22 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ुमर तफ़सीर - आयत 22

"तो क्या वह शख़्स जिसका सीना अल्लाह ने इस्लाम के लिए खोल दिया [61], पस वह अपने रब की तरफ़ से एक नूर (रौशनी) पर है [62] (क्या वह संगदिल जैसा है?) पस ख़राबी है उन लोगों के लिए जिनके दिल अल्लाह के ज़िक्र से सख़्त हो चुके हैं [63] [64]! वे खुली गुमराही में हैं।"

[61] शरहे सदर और हिदायत

इस्लाम के लिए दिल का खुलना अल्लाह का अज़ीम नूर और फ़ज़्ल है।

[62] नूरे इलाही के मरातिब

आम मोमिन का नूर चिराग़ की तरह, औलिया का नूर रौशन बल्ब की तरह, और हुज़ूर ﷺ का नूरे मुबारक़ सूरज की तरह है जिससे पूरी कायनात मुनव्वर है।

[63] दिलों की सख़्ती (क़सावते क़ल्ब)

जिनके दिल अल्लाह के ज़िक्र से मुतअस्सिर नहीं होते वे पत्थर से भी ज़्यादा सख़्त हैं।

[64] ज़िक्रे इलाही और दुरुद शरीफ़ की बरकत

कसरत से दुरुद शरीफ़ पढ़ने और ज़िक्रे इलाही करने से दिल की सख़्ती दूर होती है और ख़ात्मा बिल-ख़ैर नसीब होता है।

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