Transliteration: (Yā ayyuhā al-nāsu antumu al-fuqarāʾu ilā Allāhi wa Allāhu Huwa al-Ghaniyyu al-Hamīd)
"ऐ लोगो! तुम सब अल्लाह के मोहताज हो [55], और अल्लाह ही बे-नियाज़, हर तारीफ़ के लायक़ है।"
इंसान अपनी पैदाइश, सांस, रिज़्क़ और हयात के हर लम्हे में अल्लाह का मोहताज है। अगर कोई शख़्स किसी दूसरे की हाजत पूरी करता है तो वह भी अल्लाह के दिए हुए से करता है। हक़ीक़ी बे-नियाज़ सिर्फ़ अल्लाह है, और हुज़ूर ﷺ अल्लाह की अता की तक्सीम फ़रमाने वाले (क़ासिम) हैं, जैसा कि हदीस शरीफ़ में है: "इन्नमा अना क़ासिमुन वल्लाहु यु'ती" (देने वाला अल्लाह है और बांटने वाला मैं हूँ)।
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