कुरान - 35:13 सूरह फातिर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

13
يُولِجُ ٱلَّيۡلَ فِي ٱلنَّهَارِ وَيُولِجُ ٱلنَّهَارَ فِي ٱلَّيۡلِ وَسَخَّرَ ٱلشَّمۡسَ وَٱلۡقَمَرَۖ كُلّٞ يَجۡرِي لِأَجَلٖ مُّسَمّٗىۚ ذَٰلِكُمُ ٱللَّهُ رَبُّكُمۡ لَهُ ٱلۡمُلۡكُۚ وَٱلَّذِينَ تَدۡعُونَ مِن دُونِهِۦ مَا يَمۡلِكُونَ مِن قِطۡمِيرٍ

Transliteration: (Yoolijul laila fin nahaari wa yoolijun nahaara fil laili wa sakhkharash shamsa wal qamara kulluny yajree li ajalim musammaa; zaalikumul laahu Rabbukum lahul mulk; wallazeena tad'oona min doonihee maa yamlikoona min qitmeer)

वह रात को दिन में पिरोता है और दिन को रात में पिरोता है [46], और उसने सूरज और चाँद को काम में लगा रखा है [47]; हर एक एक मुक़र्रर मुद्दत तक चल रहा है [48]; यही अल्लाह तुम्हारा रब है, उसी की बादशाही है [49]; और जिन्हें तुम उसके सिवा पूजते हो वे खजूर की गुठली के छिलके (क़ितमीर) के बराबर भी किसी चीज़ के मालिक नहीं हैं [50]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फातिर आयत 13 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ातिर तफ़सीर - आयत 13

"वह रात को दिन में पिरोता है और दिन को रात में पिरोता है [46], और उसने सूरज और चाँद को काम में लगा रखा है [47]; हर एक एक मुक़र्रर मुद्दत तक चल रहा है [48]; यही अल्लाह तुम्हारा रब है, उसी की बादशाही है [49]; और जिन्हें तुम उसके सिवा पूजते हो वे खजूर की गुठली के छिलके के बराबर भी किसी चीज़ के मालिक नहीं हैं [50]!"

[46] रात और दिन का घटना-बढ़ना

सर्दियों में रातें लंबी और दिन छोटे, और गर्मियों में इसके बरअक्स होना रात के दिन में और दिन के रात में दाख़िल होने की वजह से है। यह निज़ामे इलाही का मुकम्मल निज़ाम है।

[47] शम्स व क़मर की मुसलसल ख़िदमत

सूरज और चाँद बग़ैर किसी थकावट या मरम्मत के मुसलसल मख़्लूक़ की ख़िदमत में गर्दिश कर रहे हैं। यह सब अल्लाह के हुक्म और क़ुदरत से हो रहा है।

[48] अफ़लाक व सैयारात की हरकत और क़यामत की मियाद

सूरज, चाँद और सितारे गर्दिश में हैं और उनकी यह हरकत 'अजलिन मुसम्मा' यानी क़यामत के मुअय्यन वक़्त तक जारी रहेगी, जब यह निज़ाम लपेट दिया जाएगा।

[49] बादशाही सिर्फ़ अल्लाह ही की है

आसमानों और ज़मीनों की मुतलक़ हुकूमत व बादशाही सिर्फ़ अल्लाह वाहिद व ला-शरीक के लिए है। उसकी सुलतानियत में कोई साझीदार नहीं।

[50] बुतों की बे-बसी और अंबिया की शान

यह आयत मुशरिक़ीने मक्का के बे-जान बुतों के बारे में है जो खजूर की गुठली की बारीक झिल्ली जितने भी अख़्तियार नहीं रखते। इस आयत को नबी ﷺ या औलिया-ए-किराम पर चस्पां करना गुमराहों का तरीक़ा है। अल्लाह ने अपने महबूब ﷺ को ज़मीन के ख़ज़ानों की कुंजियां अता फ़रमाई हैं और क़यामत के दिन शफ़ाअते कुबरा का मालिक बनाया है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now