Transliteration: (Yoolijul laila fin nahaari wa yoolijun nahaara fil laili wa sakhkharash shamsa wal qamara kulluny yajree li ajalim musammaa; zaalikumul laahu Rabbukum lahul mulk; wallazeena tad'oona min doonihee maa yamlikoona min qitmeer)
"वह रात को दिन में पिरोता है और दिन को रात में पिरोता है [46], और उसने सूरज और चाँद को काम में लगा रखा है [47]; हर एक एक मुक़र्रर मुद्दत तक चल रहा है [48]; यही अल्लाह तुम्हारा रब है, उसी की बादशाही है [49]; और जिन्हें तुम उसके सिवा पूजते हो वे खजूर की गुठली के छिलके के बराबर भी किसी चीज़ के मालिक नहीं हैं [50]!"
सर्दियों में रातें लंबी और दिन छोटे, और गर्मियों में इसके बरअक्स होना रात के दिन में और दिन के रात में दाख़िल होने की वजह से है। यह निज़ामे इलाही का मुकम्मल निज़ाम है।
सूरज और चाँद बग़ैर किसी थकावट या मरम्मत के मुसलसल मख़्लूक़ की ख़िदमत में गर्दिश कर रहे हैं। यह सब अल्लाह के हुक्म और क़ुदरत से हो रहा है।
सूरज, चाँद और सितारे गर्दिश में हैं और उनकी यह हरकत 'अजलिन मुसम्मा' यानी क़यामत के मुअय्यन वक़्त तक जारी रहेगी, जब यह निज़ाम लपेट दिया जाएगा।
आसमानों और ज़मीनों की मुतलक़ हुकूमत व बादशाही सिर्फ़ अल्लाह वाहिद व ला-शरीक के लिए है। उसकी सुलतानियत में कोई साझीदार नहीं।
यह आयत मुशरिक़ीने मक्का के बे-जान बुतों के बारे में है जो खजूर की गुठली की बारीक झिल्ली जितने भी अख़्तियार नहीं रखते। इस आयत को नबी ﷺ या औलिया-ए-किराम पर चस्पां करना गुमराहों का तरीक़ा है। अल्लाह ने अपने महबूब ﷺ को ज़मीन के ख़ज़ानों की कुंजियां अता फ़रमाई हैं और क़यामत के दिन शफ़ाअते कुबरा का मालिक बनाया है।
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