कुरान - 35:14 सूरह फातिर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

14
إِن تَدۡعُوهُمۡ لَا يَسۡمَعُواْ دُعَآءَكُمۡ وَلَوۡ سَمِعُواْ مَا ٱسۡتَجَابُواْ لَكُمۡۖ وَيَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ يَكۡفُرُونَ بِشِرۡكِكُمۡۚ وَلَا يُنَبِّئُكَ مِثۡلُ خَبِيرٖ

Transliteration: (In tadʿūhum lā yasmaʿū duʿāʾakum wa law samiʿū mas tajaabū lakum; wa Yawma al-Qiyāmati yakfurūna bishirkikum; wa lā yunabbiʾuka mislu khabīr)

अगर तुम उन्हें पुकारो तो वे तुम्हारी पुकार नहीं सुनते [51], और अगर सुन भी लें तो तुम्हारी फ़रियाद का कोई जवाब नहीं दे सकते [52]; और क़यामत के दिन वे तुम्हारे शिर्क का साफ़ इंकार कर देंगे [53]; और आपको पूरी ख़बर रखने वाले (अल्लाह) की तरह कोई बा-ख़बर न करेगा [54]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फातिर आयत 14 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ातिर तफ़सीर - आयत 14

"अगर तुम उन्हें पुकारो तो वे तुम्हारी पुकार नहीं सुनते [51], और अगर सुन भी लें तो तुम्हारी फ़रियाद का कोई जवाब नहीं दे सकते [52]; और क़यामत के दिन वे तुम्हारे शिर्क का साफ़ इंकार कर देंगे [53]; और आपको पूरी ख़बर रखने वाले की तरह कोई बा-ख़बर न करेगा [54]!"

[51] बे-जान पत्थरों और बुतों की बे-हिकमती

यह बात पत्थरों, दरख़्तों और बुतों के बारे में है जो न सुनते हैं और न समझते हैं। बे-जान बुतों की पूजा करना सरासर जहालत है।

[52] हाजत-रवाई से आजिज़ बुत

बुत बे-जान हैं, वे किसी की मुराद पूरी करने या मुसीबत टालने की सलाहियत नहीं रखते।

[53] बुतों का इंकार — अंबिया व औलिया का सुनना हक़ है

क़यामत में बुत मुशरिकीन की इबादत से बेज़ारी का ऐलान करेंगे। यह आयत बुतों के लिए है, अंबिया व औलिया के लिए नहीं। अंबिया व सालेहीन ब-इज़ने इलाही सुनते हैं और मदद फ़रमाते हैं, इसी लिए हम नबी-ए-पाक ﷺ पर सलाम भेजते हैं और आप जवाब अता फ़रमाते हैं।

[54] ख़बीरे मुतलक़ (अल्लाह) की ख़बर बे-नज़ीर है

अल्लाह तआला ज़ाहिर व बातिन और दोनों जहानों का पूरा इल्म रखता है। उसके बताने जैसा कोई दूसरा बा-ख़बर नहीं कर सकता।

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