Transliteration: (In tadʿūhum lā yasmaʿū duʿāʾakum wa law samiʿū mas tajaabū lakum; wa Yawma al-Qiyāmati yakfurūna bishirkikum; wa lā yunabbiʾuka mislu khabīr)
"अगर तुम उन्हें पुकारो तो वे तुम्हारी पुकार नहीं सुनते [51], और अगर सुन भी लें तो तुम्हारी फ़रियाद का कोई जवाब नहीं दे सकते [52]; और क़यामत के दिन वे तुम्हारे शिर्क का साफ़ इंकार कर देंगे [53]; और आपको पूरी ख़बर रखने वाले की तरह कोई बा-ख़बर न करेगा [54]!"
यह बात पत्थरों, दरख़्तों और बुतों के बारे में है जो न सुनते हैं और न समझते हैं। बे-जान बुतों की पूजा करना सरासर जहालत है।
बुत बे-जान हैं, वे किसी की मुराद पूरी करने या मुसीबत टालने की सलाहियत नहीं रखते।
क़यामत में बुत मुशरिकीन की इबादत से बेज़ारी का ऐलान करेंगे। यह आयत बुतों के लिए है, अंबिया व औलिया के लिए नहीं। अंबिया व सालेहीन ब-इज़ने इलाही सुनते हैं और मदद फ़रमाते हैं, इसी लिए हम नबी-ए-पाक ﷺ पर सलाम भेजते हैं और आप जवाब अता फ़रमाते हैं।
अल्लाह तआला ज़ाहिर व बातिन और दोनों जहानों का पूरा इल्म रखता है। उसके बताने जैसा कोई दूसरा बा-ख़बर नहीं कर सकता।
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