Transliteration: (Wa maa yastawil bahraani haaza 'azbun furaatun saaa'ighun sharaabuhoo wa haazaa milhun ujaaj; wa min kullin ta'kuloona lahman tariyyanw wa tastakhrijoona hilyatan talbasoonahaa wa taral fulka feehi mawaakhira litabtaghoo min fadlihee wa la'allakum tashkuroon)
"और दोनों समुंदर एक जैसे नहीं होते [40]; यह एक मीठा, प्यास बुझाने वाला, पीने में ख़ुशगवार है [41], और यह दूसरा खारा, कड़वा है [42]; और तुम हर एक में से ताज़ा गोश्त खाते हो और ज़ेवर निकालते हो जिसे तुम पहनते हो [43]; और आप उसमें कश्तियों को देखते हैं जो पानी को चीरती हुई चलती हैं [44] ताकि तुम उसका फ़ज़्ल तलाश करो [45] और ताकि तुम शुक्र अदा करो।"
मीठे और खारे समुंदर ज़ाहिरी शक्ल में पानी होने के बावजूद ज़ायके और तासीर में बराबर नहीं हैं। हर एक की अपनी ख़ुसूसियत और हिकमत है।
जिस तरह दोनों दरिया बराबर नहीं हो सकते, उसी तरह मोमिन और काफ़िर बराबर नहीं हो सकते। जब दो पानी बराबर नहीं, तो आम इंसान और अंबिया-ए-किराम कैसे बराबर हो सकते हैं! अंबिया की ज़ात मख़्लूक़ में बे-मिसाल और मुक़द्दस है।
मछली को ताज़ा गोश्त फ़रमाया गया क्योंकि यह जल्दी ख़राब होती है। फ़िक़्ही मस्अला: अगर किसी ने गोश्त न खाने की क़सम खाई और मछली खा ली तो क़सम नहीं टूटेगी, क्योंकि क़ुरआन का लफ़्ज़ आम है और फ़िक़्ह का उसूल मुअय्यन है।
समुंदर से मोती व मूंगा निकलते हैं। औरतें ज़ेवर पहनती हैं और मर्द उनके हुस्न से महज़ूज़ होते हैं। मर्दों के लिए मोती पहनना जायज़ है, जबकि सोना व चांदी हराम है (तफ़सील फ़तावा-ए-नईमी में मुलाहिज़ा हो)।
भारी-भरकम जहाज़ों का हल्के पानी पर न डूबना और मौजों को चीरते हुए चलना अल्लाह तआला की क़ुदरत और बुज़ुर्गी की निशानी है।
सफ़र और तिजारत से हलाल रिज़्क़ कमाना और इसी तरह हज, ज़ियाराते औलिया और दीनी सफ़र करना सब अल्लाह के फ़ज़्ल की तलाश में शामिल है।
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