Transliteration: (Wallaahu khalaqakum min turaabin summa min nutfatin summa ja'alakum azwaajaa; wa maa tahmilu min unsaa wa laa tada'u illaa bi'ilmih; wa maa yu'ammaru mim mu'ammarinw wa laa yunqasu min 'umuriheee illaa fee kitaab; inna zaalika 'alal laahi yaseer)
"और अल्लाह ने तुम्हें मिट्टी से पैदा किया [34], फिर नुत्फ़े से, फिर तुम्हें जोड़े-जोड़े बना दिया [35]; और न कोई औरत हामिला होती है और न बच्चा जनती है मगर उसके इल्म से [36]; और न किसी उम्र पाने वाले की उम्र में इज़ाफ़ा होता है और न उसकी उम्र घटती है [37] मगर वह एक किताब में दर्ज है [38]; बेशक यह अल्लाह के लिए बहुत आसान है [39]!"
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की पैदाइश मिट्टी से हुई, फिर उनकी औलाद की पैदाइश नुत्फ़े से रखी गई। मिट्टी से ग़िज़ा, ग़िज़ा से ख़ून, ख़ून से नुत्फ़ा और नुत्फ़े से इंसान का वजूद अल्लाह की क़ुदरत का इज़हार है।
अल्लाह ने मर्द व औरत, मोमिन व काफ़िर, नेक व बद के जोड़े बनाए। इंसानी रूहों को भी जोड़ियों की सूरत में तख़्लीक़ फ़रमाया गया।
अल्लाह तआला रहमे मादर के हर अहवाल, बच्चे की तक़दीर, रंग-रूप और विलादत के लम्हे-लम्हे से बा-ख़बर है। अल्लाह अपने मुक़र्रब बंदों को भी ब-इज़ने इलाही इसका इल्म अता फ़रमाता है।
दुआ, सिलए रहमी और नेक आमाल से उम्र में बरकत व इज़ाफ़ा होता है, और गुनाहों से उम्र घटती है। यह सब कुछ लौहे महफ़ूज़ में पहले से दर्ज है। जैसे शैतान की उम्र उसकी दुआ से क़यामत तक बढ़ाई गई।
अल्लाह के कामिल औलिया-ए-किराम की नज़र ब-इज़ने इलाही लौहे महफ़ूज़ पर होती है, वे अल्लाह के करम से लोगों की उम्र और अहवाल जान लेते हैं।
पूरी कायनात का हिसाब रखना, उम्रों का लिखना और गै़ब की ख़बरें अपने प्यारों को अता फ़रमाना अल्लाह के लिए निहायत आसान है।
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