कुरान - 35:9 सूरह फातिर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

9
وَٱللَّهُ ٱلَّذِيٓ أَرۡسَلَ ٱلرِّيَٰحَ فَتُثِيرُ سَحَابٗا فَسُقۡنَٰهُ إِلَىٰ بَلَدٖ مَّيِّتٖ فَأَحۡيَيۡنَا بِهِ ٱلۡأَرۡضَ بَعۡدَ مَوۡتِهَاۚ كَذَٰلِكَ ٱلنُّشُورُ

Transliteration: (Wallaahul lazeee arsalar riyaaha fatuseeru sa haaban fasuqnaahu ilaa baladim maiyitin fa ahyaynaa bihil arda ba'da mawtihaa; kazaalikan nushoor)

और अल्लाह ही है जो हवाओं को भेजता है [26] तो वे बादलों को उठाती हैं, फिर हम उसे एक मुर्दा ज़मीन की तरफ़ ले जाते हैं [27] और उसके ज़रिये ज़मीन को उसके मुर्दा होने के बाद ज़िंदा करते हैं [28]; इसी तरह (क़यामत के दिन मुर्दों का) दोबारा उठना होगा [29]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फातिर आयत 9 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ातिर तफ़सीर - आयत 9

"और अल्लाह ही है जो हवाओं को भेजता है [26] तो वे बादलों को उठाती हैं, फिर हम उसे एक मुर्दा ज़मीन की तरफ़ ले जाते हैं [27] और उसके ज़रिये ज़मीन को उसके मुर्दा होने के बाद ज़िंदा करते हैं [28]; इसी तरह (क़यामत के दिन मुर्दों का) दोबारा उठना होगा [29]!"

[26] हवाओं का निज़ाम और कुदरते इलाही

अल्लाह तआला हवाओं को उनके मख़्सूस मक़ाम से भेजता है। 'इरसाल' का मानी छोड़ना और रवाना करना है। हवाएं बादलों को उठाकर पानी के निज़ाम को जारी करती हैं जो अल्लाह की अज़ीम हिकमत का सुबूत है।

[27] बादलों की रहनुमाई

बादल अपनी मर्ज़ी से नहीं चलते बल्कि अल्लाह के हुक्म के ताबे हैं। वे एक जगह से उठकर उस बंजर ज़मीन पर बरसते हैं जहाँ ख़ुदा का हुक्म होता है।

[28] मुर्दा ज़मीन का ज़िंदा होना

बारिश के क़तरों से सूखी बे-जान ज़मीन लहलहा उठती है, घास और दरख़्त उग आते हैं। जो ज़ात सूखी मिट्टी में जान डाल सकती है, वह मुर्दा इंसानों को भी ज़िंदा कर सकती है।

[29] बा'स बादुल मौत (दोबारा उठने) की अक़्ली दलील

दुनियावी वाक़िआत से आख़िरत के अहवाल को समझना और क़ियास करना बिल्कुल सही है। बारिश से ज़मीन का ज़िंदा होना क़यामत के दिन मुर्दों के दोबारा उठने की मुकम्मल मिसाल है।

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