कुरान - 35:7 सूरह फातिर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لَهُمۡ عَذَابٞ شَدِيدٞۖ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَٰتِ لَهُم مَّغۡفِرَةٞ وَأَجۡرٞ كَبِيرٌ

Transliteration: (Allazeena kafaroo lahum 'azaabun shadeed; wallazeena aamanoo wa 'amilus saalihaati lahum maghfiratunw wa ajrun kabeer (section 1))

जिन लोगों ने कुफ़्र किया उनके लिए सख़्त अज़ाब है [22]; और जो लोग ईमान लाए और उन्होंने नेक अमल किए, उनके लिए मग़फ़िरत और बहुत बड़ा अज्र है [23]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फातिर आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ातिर तफ़सीर - आयत 7

"जिन लोगों ने कुफ़्र किया उनके लिए सख़्त अज़ाब है [22]; और जो लोग ईमान लाए और उन्होंने नेक अमल किए, उनके लिए मग़फ़िरत और बहुत बड़ा अज्र है [23]!"

[22] कुफ़्र की दायमी सज़ा

काफ़िरों के लिए हमेशा की रुसवाई और अज़ाब है। मोमिनीन में से अगर कोई गुनहगार हुआ तो अल्लाह चाहे तो अपने फ़ज़्ल या शफ़ाअत से उसे बख़्श देगा और हमेशा की रुसवाई से महफ़ूज़ रखेगा।

[23] ईमान की अव्वलीयत और नेक आमाल का अज्र

यहाँ दो बुनियादी उसूल मालूम हुए:

  1. अमल से पहले ईमान शर्त है, बग़ैर ईमान के कोई नेक अमल बारगाहे इलाही में क़बूल नहीं।
  2. नेक आमाल मग़फ़िरत और गुनाहों के मिटने का सबब बनते हैं, जैसा कि फ़रमाया गया: "बेशक नेकियां बुराइयों को मिटा देती हैं" (सूरह हूद)।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now