कुरान - 35:6 सूरह फातिर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

6
إِنَّ ٱلشَّيۡطَٰنَ لَكُمۡ عَدُوّٞ فَٱتَّخِذُوهُ عَدُوًّاۚ إِنَّمَا يَدۡعُواْ حِزۡبَهُۥ لِيَكُونُواْ مِنۡ أَصۡحَٰبِ ٱلسَّعِيرِ

Transliteration: (Innash shaitaana lakum 'aduwwun fattakhizoohu 'aduwwaa; innamaa yad'oo hizbahoo liyakoonoo min ashaabis sa'eer)

बेशक शैतान तुम्हारा खुला दुश्मन है [19], पस तुम भी उसे दुश्मन ही समझो [20]; वह तो बस अपने गिरोह को इसलिए बुलाता है [21] ताकि वे भड़कती आग (दोज़ख़) वालों में से हो जाएं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फातिर आयत 6 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ातिर तफ़सीर - आयत 6

"बेशक शैतान तुम्हारा खुला दुश्मन है [19], पस तुम भी उसे दुश्मन ही समझो [20]; वह तो बस अपने गिरोह को इसलिए बुलाता है [21] ताकि वे भड़कती आग (दोज़ख़) वालों में से हो जाएं।"

[19] शैतान ने तुम्हें जन्नत से निकाला

इबलीस की वजह से हज़रत आदम अलैहिस्सलाम और बनी नौए इंसान को जन्नत से ज़मीन पर लाया गया। पस हमारा फ़र्ज़ है कि हम उस शैतान को अपने दिलों से निकाल बाहर करें और उसे अपना जानी दुश्मन समझें।

[20] शैतानी मक्र से हर लम्हा होशियार रहना

शैतान की दुश्मनी से किसी लम्हे ग़ाफ़िल नहीं होना चाहिए। उसने बड़े-बड़े आबिदों को अक़ीदों और आमाल में गुमराह किया है। हर मोड़ पर उसकी मुख़ालिफ़त लाज़िम है।

[21] दो गिरोह: रहमानी और शैतानी

इंसान दो जमाअतों में बंटे हैं — हिज़्बुर-रहमान (अल्लाह की जमाअत) और हिज़्बुश-शैतान। क़यामत के दिन हर गिरोह अपने पेशवा के साथ होगा; शैतानी गिरोह दोज़ख़ में और रहमानी गिरोह अल्लाह के महबूबों के साथ जन्नत में होगा।

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