Transliteration: (Wa iny yukazzibooka faqad kuzzibat Rusulum min qablik; wa ilal laahi turja'ul umoor)
"और अगर वे आपको झुठलाएं [13], तो बेशक आपसे पहले भी बहुत से रसूल झुठलाए जा चुके हैं [14]; और तमाम मामलात अल्लाह ही की तरफ़ लौटाए जाते हैं [15]।"
अरब के मुशरिक़ीन ग़ल्ले, ज़मीन, सूरज और बारिश जैसी चीज़ों को पूजते थे जो रिज़्क़ के ज़ाहिरी अस्बाब हैं। आयत तालीम देती है कि इबादत सिर्फ़ रज़्ज़ाक़े हक़ीक़ी की है, अस्बाब की नहीं।
काफ़िरों की तकज़ीब पर हुज़ूर ﷺ को ग़मगीन होने से मना फ़रमाया गया। पिछले पैग़ंबरों को भी उनकी क़ौमों ने झुठलाया था और उन्होंने सब्र फ़रमाया। अपने हबीब ﷺ को तसल्ली देना सुन्नते इलाही है।
तबलीग़े दीन पर हुज़ूर ﷺ को अज़ीम अज्र मिलेगा और मुनकिरीन को उनकी सरकशी की सज़ा मिलेगी। तमाम मामलात का आख़िरी फ़ैसला अल्लाह ही की बारगाह में होना है।
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