कुरान - 35:5 सूरह फातिर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ إِنَّ وَعۡدَ ٱللَّهِ حَقّٞۖ فَلَا تَغُرَّنَّكُمُ ٱلۡحَيَوٰةُ ٱلدُّنۡيَا وَلَا يَغُرَّنَّكُم بِٱللَّهِ ٱلۡغَرُورُ

Transliteration: (Yaaa ayyuhan naasu inna wa'dal laahi haqqun falaa taghurrannakumul hayaatud dunyaa; wa laa yaghurran nakum billaahil gharoor)

ऐ लोगो! बेशक अल्लाह का वादा सच्चा है [16], पस दुनियावी ज़िंदगी तुम्हें हरगिज़ धोखे में न डाले [17], और न वह बड़ा धोखेबाज़ (शैतान) तुम्हें अल्लाह के बारे में धोखे में रखे [18]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फातिर आयत 5 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ातिर तफ़सीर - आयत 5

"ऐ लोगो! बेशक अल्लाह का वादा सच्चा है [16], पस दुनियावी ज़िंदगी तुम्हें हरगिज़ धोखे में न डाले [17], और न वह बड़ा धोखेबाज़ (शैतान) तुम्हें अल्लाह के बारे में धोखे में रखे [18]!"

[16] अल्लाह का वादा अटल है — किज़्ब से पाक

अल्लाह का वादा हक़ है, उसमें किज़्ब (झूठ) का इम्कान मुहाल है। तंबीह और अज़ाब को टालना या माफ़ कर देना अल्लाह की रहमत है, इसे वादा-ख़िलाफ़ी नहीं कहा जाता क्योंकि माफ़ी करम है।

[17] दुनियावी ऐशो-इशरत का फ़रेब

दुनिया की फ़ानी लज़्ज़तों में गुम होकर आख़िरत को न भुला बैठो। गुनाहों पर फ़ौरन अज़ाब न आना अल्लाह की मोहलत व हिल्म है, लापरवाही नहीं।

[18] 'ग़रूर' — बड़ा फ़रेबी शैतान

ग़रूर से मुराद शैतान है जो इंसान को झूठी उम्मीदों और गुनाहों में मुब्तला करके हलाक करता है। बुज़ुर्गान-ए-दीन फ़रमाते हैं कि जो दौलत या मर्तबा ख़ुदा से ग़ाफ़िल कर दे, वह सरासर धोखा है।

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