Transliteration: (Yaaa ayyuhan naasu inna wa'dal laahi haqqun falaa taghurrannakumul hayaatud dunyaa; wa laa yaghurran nakum billaahil gharoor)
"ऐ लोगो! बेशक अल्लाह का वादा सच्चा है [16], पस दुनियावी ज़िंदगी तुम्हें हरगिज़ धोखे में न डाले [17], और न वह बड़ा धोखेबाज़ (शैतान) तुम्हें अल्लाह के बारे में धोखे में रखे [18]!"
अल्लाह का वादा हक़ है, उसमें किज़्ब (झूठ) का इम्कान मुहाल है। तंबीह और अज़ाब को टालना या माफ़ कर देना अल्लाह की रहमत है, इसे वादा-ख़िलाफ़ी नहीं कहा जाता क्योंकि माफ़ी करम है।
दुनिया की फ़ानी लज़्ज़तों में गुम होकर आख़िरत को न भुला बैठो। गुनाहों पर फ़ौरन अज़ाब न आना अल्लाह की मोहलत व हिल्म है, लापरवाही नहीं।
ग़रूर से मुराद शैतान है जो इंसान को झूठी उम्मीदों और गुनाहों में मुब्तला करके हलाक करता है। बुज़ुर्गान-ए-दीन फ़रमाते हैं कि जो दौलत या मर्तबा ख़ुदा से ग़ाफ़िल कर दे, वह सरासर धोखा है।
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