कुरान - 35:3 सूरह फातिर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ ٱذۡكُرُواْ نِعۡمَتَ ٱللَّهِ عَلَيۡكُمۡۚ هَلۡ مِنۡ خَٰلِقٍ غَيۡرُ ٱللَّهِ يَرۡزُقُكُم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ وَٱلۡأَرۡضِۚ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ فَأَنَّىٰ تُؤۡفَكُونَ

Transliteration: (Yaaa ayyuhan naasuzkuroo ni'matal laahi 'alaikum; hal min khaaliqin ghairul laahi yarzuqukum minas samaaa'i wal ard; laaa ilaaha illaa Huwa fa annaa tu'fakoon)

ऐ लोगो! अपने ऊपर अल्लाह की नेमत को याद करो; क्या अल्लाह के सिवा कोई और ख़ालिक़ है [10] जो तुम्हें आसमान और ज़मीन से रिज़्क़ देता हो [11]? उसके सिवा कोई माबूद नहीं, फिर तुम किधर औंधे (बहके) जा रहे हो [12]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फातिर आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ातिर तफ़सीर - आयत 3

"ऐ लोगो! अपने ऊपर अल्लाह की नेमत को याद करो; क्या अल्लाह के सिवा कोई और ख़ालिक़ है [10] जो तुम्हें आसमान और ज़मीन से रिज़्क़ देता हो [11]? उसके सिवा कोई माबूद नहीं, फिर तुम किधर औंधे जा रहे हो [12]?"

[10] नेमत की याद इबादत है — हुज़ूर ﷺ अज़ीम तरीन नेमत हैं

अल्लाह तआला की नेमतों का तज़किरा और शुक्र बजा लाना ऐन इबादत है। हुज़ूर अकरम ﷺ अल्लाह तआला की सबसे अज़ीम नेमत और रहमत हैं, इसलिए आपका ज़िक्र व मिलाद मनाना भी अज़ीम इबादत और शुक्रगुज़ारी है।

[11] अल्लाह ही बंदों के आमाल और रिज़्क़ का ख़ालिक़ है

इस आयत में मोतज़िला का रद्द है जो बंदे को अपने आमाल का ख़ालिक़ कहते हैं। हक़ीक़त यह है कि बंदे के आमाल और उसका रिज़्क़ सब अल्लाह ही की तख़्लीक़ हैं; बंदा सिर्फ़ कासिब (वसीला) है, ख़ालिक़ नहीं।

[12] हक़ीक़ी रज़्ज़ाक़ की तरफ़ रुजू

जब आसमान से बारिश बरसाने और ज़मीन से ग़ल्ला उगाने वाला सिर्फ़ अल्लाह है, तो इंसान को रिज़्क़ की तलब में अपने दिल का ताल्लुक़ सिर्फ़ अल्लाह से जोड़ना चाहिए। तमाम अस्बाब सिर्फ़ ज़रिया हैं, रज़्ज़ाक़ नहीं।

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