कुरान - 35:2 सूरह फातिर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

2
مَّا يَفۡتَحِ ٱللَّهُ لِلنَّاسِ مِن رَّحۡمَةٖ فَلَا مُمۡسِكَ لَهَاۖ وَمَا يُمۡسِكۡ فَلَا مُرۡسِلَ لَهُۥ مِنۢ بَعۡدِهِۦۚ وَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ

Transliteration: (Maa yaftahil laahu linnaaasi mir rahmatin falaa mumsika lahaa wa maa yumsik falaa mursila lahoo mimba'dihi; wa Huwal 'Azeezul Hakeem)

अल्लाह लोगों के लिए अपनी रहमत में से जो कुछ खोल दे, तो कोई उसे रोकने वाला नहीं [6]; और जिसे वह रोक ले, तो उसके बाद कोई उसे जारी करने वाला नहीं [7]; और वही ज़बरदस्त (ग़ालिब) [8], बड़ी हिकमत वाला है [9]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फातिर आयत 2 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ातिर तफ़सीर - आयत 2

"अल्लाह लोगों के लिए अपनी रहमत में से जो कुछ खोल दे, तो कोई उसे रोकने वाला नहीं [6]; और जिसे वह रोक ले, तो उसके बाद कोई उसे जारी करने वाला नहीं [7]; और वही ज़बरदस्त (ग़ालिब) [8], बड़ी हिकमत वाला है [9]।"

[6] अल्लाह की क़ुदरत और अता बे-मिसाल है

अल्लाह तआला की क़ुदरत और उसकी मशिय्यत कायनात की हर चीज़ पर मुहीत है। जिसे वह अपनी रहमत अता फ़रमाए उसे दुनिया की कोई ताक़त रोक नहीं सकती। उसकी कुदरत इंसानी वहम व गुमान से भी बालातर है।

[7] रूहानी व दुनियावी रहमतें और तवक्कुल

रहमत आम है — इसमें दीनी रहमत (ईमान, मारिफ़त, इल्म) और दुनियावी रहमत (सेहत, रिज़्क़, औलाद, बारिश) सब शामिल हैं। जब देने और रोकने वाला सिर्फ़ अल्लाह है, तो बंदे को अपनी तमाम उम्मीदें उसी से बांधनी चाहिए और सिर्फ़ उसी पर कामिल भरोसा (तवक्कुल) रखना चाहिए।

[8] हदीसे शरीफ़ की ताईद

इस आयत की तफ़सीर में हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की यह मुबारक दुआ है:
"ऐ अल्लाह! जिसे तू अता फ़रमाए उसे कोई रोकने वाला नहीं, और जिसे तू रोक ले उसे कोई देने वाला नहीं।"

[9] अल्लाह की तक्सीम हिकमत पर मब्नी है

अल्लाह तआला ने जिसे जो कुछ दिया है वह कमाल हिकमत और मस्लहत के तहत दिया है। किसी को अमीर और किसी को ग़रीब बनाना उसकी हिकमत का तक़ाज़ा है; उसकी तक़सीम पर एतराज़ करने वाला नादान व जाहिल है।

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