कुरान - 35:8 सूरह फातिर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

8
أَفَمَن زُيِّنَ لَهُۥ سُوٓءُ عَمَلِهِۦ فَرَءَاهُ حَسَنٗاۖ فَإِنَّ ٱللَّهَ يُضِلُّ مَن يَشَآءُ وَيَهۡدِي مَن يَشَآءُۖ فَلَا تَذۡهَبۡ نَفۡسُكَ عَلَيۡهِمۡ حَسَرَٰتٍۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمُۢ بِمَا يَصۡنَعُونَ

Transliteration: (Afaman zuyyina lahoo sooo'u 'amalihee fara aahu hasanaa; fa innal laaha yudillu mai yashaaa'u wa yahdee mai yashaaa'u falaa tazhab nafsuka 'alaihim hasaraat; innal laaha 'aleemun bimaa yasna'oon)

भला क्या वह शख़्स जिसके लिए उसका बुरा अमल ख़ुशनुमा बना दिया गया हो पस वह उसे अच्छा समझता हो (उस जैसा हो सकता है जो हिदायत पर है) [24]? पस बेशक अल्लाह जिसे चाहता है गुमराह छोड़ देता है और जिसे चाहता है हिदायत अता फ़रमाता है; पस आपकी जान उन पर हसरतों (ग़म) में न घुले [25]; बेशक अल्लाह ख़ूब जानता है जो कुछ वे करते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फातिर आयत 8 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ातिर तफ़सीर - आयत 8

"भला क्या वह शख़्स जिसके लिए उसका बुरा अमल ख़ुशनुमा बना दिया गया हो पस वह उसे अच्छा समझता हो [24]? पस बेशक अल्लाह जिसे चाहता है गुमराह छोड़ देता है और जिसे चाहता है हिदायत अता फ़रमाता है; पस आपकी जान उन पर हसरतों में न घुले [25]; बेशक अल्लाह ख़ूब जानता है जो कुछ वे करते हैं।"

[24] बुरे आमाल को अच्छा समझना — बद-तरीन गुमराही

यह आयत अबू जहल और मुशरिक़ीने मक्का के हक़ में नाज़िल हुई जो गुनाह व शिर्क करते थे और उस पर फ़ख़्र जताते थे। अपनी बुराई को हुस्न समझना नफ़्स का सबसे बड़ा फ़रेब है, जिससे तौबा का दरवाज़ा बंद हो जाता है।

[25] नबी-ए-करीम ﷺ की जानिब से शफ़क़त और तसल्ली

हुज़ूर अकरम ﷺ को फ़रमाया गया कि इन बद-बख़्तों के ईमान न लाने पर अपना दिल रंजीदा न फ़रमाएं। उनका कुफ़्र इस्लाम या आपकी मुबारक ज़ात को कोई नुक़सान नहीं पहुँचा सकता।

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