Transliteration: (In yashaʾ yudhhibkum wa yaʾti bikhalkin jadīd)
"अगर वह चाहे तो तुम्हें ख़त्म कर दे और एक नई मख़्लूक़ ले आए [56]!"
इस आयत का मफ़हूम यह है कि अगर अल्लाह तआला चाहे तो नाफ़रमान और सरकश क़ौम को नेस्त व नाबूद कर दे, और उनकी जगह एक नई, इताअतगुज़ार और फ़रमांबरदार क़ौम को ले आए।
दूसरा मफ़हूम यह है कि वह इस मौजूदा दुनिया को फ़ना करके एक बिल्कुल नई दुनिया और नई मख़्लूक़ वजूद में ला सकता है। यह अल्लाह तआला की क़ुदरते कामिला और बे-नियाज़ी का वाज़ेह इज़हार है कि वह किसी भी मख़्लूक़ का मोहताज नहीं है।
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