Transliteration: (Wa ja'ala feehaa rawaa siya min fawqihaa wa baaraka feehaa wa qaddara feehaaaa aqwaatahaa feee arba'ati ayyaamin sawaaa'al lissaaa'ileen)
और उसने उसमें उसके ऊपर से à¤à¤¾à¤°à¥€ पहाड़ रख दिठ[21] और उसमें बरकत रखी [22] और उसने उसमें उसकी ग़िज़ाओं (रिज़à¥à¤•़) का अंदाज़ा चार दिनों में [23] मà¥à¤•़रà¥à¤°à¤° कर दिया; यह पूछने वालों के लिठ[24] बराबर तौर पर है।
अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला ने ज़मीन को हिफ़ाज़त और सà¥à¤•ून बख़à¥à¤¶à¤¨à¥‡ के लिठउस पर पहाड़ों को लंगर बना कर क़ाइम फ़रमाया, ताकि ज़मीन अपनी मख़à¥à¤²à¥‚क़ को लेकर डगमगाठनहीं और उस पर सà¥à¤•ून से ज़िंदगी बसर की जा सके।
ज़मीन में ज़ाहिरी बरकतें जैसे दरख़à¥à¤¤, फ़सलें, नहरें, दरिया और मादनियात हैं; और बातिनी बरकतें यह हैं कि ज़मीन को अंबिया-à¤-किराम, औलिया-à¤-इज़ाम और सà¥à¤²à¤¹à¤¾ के मक़दà¥à¤¦à¤¸ वजूद और आरामगाहों से मà¥à¤¶à¤°à¥à¤°à¤«à¤¼ फ़रमाया गया, जिससे यह आसà¥à¤®à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ से à¤à¥€ अफ़ज़ल मरà¥à¤¤à¤¬à¤¾ पा गई।
ज़मीन की पैदाइश दो दिन (इतवार और पीर) में हà¥à¤ˆ, और पहाड़ों व रिज़à¥à¤•़ की तक़दीर और बरकतों का निज़ाम अगले दो दिन (मंगल और बà¥à¤§) में मà¥à¤•मà¥à¤®à¤² हà¥à¤†; इस तरह कà¥à¤² चार दिन हà¥à¤à¥¤ इससे मालूम हà¥à¤† कि रिज़à¥à¤•़ का इंतिज़ाम इंसान की पैदाइश से पहले ही मà¥à¤•़रà¥à¤°à¤° कर दिया गया था, लिहाज़ा बंदे को रिज़à¥à¤•़ की तरफ़ से मà¥à¤¤à¤®à¤‡à¤¨ होकर रब की इबादत में लगना चाहिà¤à¥¤
यह वाज़ेह और हिकमत à¤à¤°à¤¾ बयान उन तमाम लोगों के सवाल का तसलà¥à¤²à¥€-बख़à¥à¤¶ जवाब है जो कायनात की तख़à¥à¤²à¥€à¤•़ और उसकी मà¥à¤¦à¥à¤¦à¤¤ के बारे में दरयाफ़à¥à¤¤ करते हैं।
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