कुरान - 41:10 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
وَجَعَلَ فِيهَا رَوَٰسِيَ مِن فَوۡقِهَا وَبَٰرَكَ فِيهَا وَقَدَّرَ فِيهَآ أَقۡوَٰتَهَا فِيٓ أَرۡبَعَةِ أَيَّامٖ سَوَآءٗ لِّلسَّآئِلِينَ

Transliteration: (Wa ja'ala feehaa rawaa siya min fawqihaa wa baaraka feehaa wa qaddara feehaaaa aqwaatahaa feee arba'ati ayyaamin sawaaa'al lissaaa'ileen)

और उसने उसमें उसके ऊपर से भारी पहाड़ रख दिए [21] और उसमें बरकत रखी [22] और उसने उसमें उसकी ग़िज़ाओं (रिज़्क़) का अंदाज़ा चार दिनों में [23] मुक़र्रर कर दिया; यह पूछने वालों के लिए [24] बराबर तौर पर है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 10

और उसने उसमें उसके ऊपर से भारी पहाड़ रख दिए [21] और उसमें बरकत रखी [22] और उसने उसमें उसकी ग़िज़ाओं (रिज़्क़) का अंदाज़ा चार दिनों में [23] मुक़र्रर कर दिया; यह पूछने वालों के लिए [24] बराबर तौर पर है।

[21] ज़मीन के लंगर यानी पहाड़

अल्लाह तआला ने ज़मीन को हिफ़ाज़त और सुकून बख़्शने के लिए उस पर पहाड़ों को लंगर बना कर क़ाइम फ़रमाया, ताकि ज़मीन अपनी मख़्लूक़ को लेकर डगमगाए नहीं और उस पर सुकून से ज़िंदगी बसर की जा सके।

[22] ज़मीन की ज़ाहिरी व बातिनी बरकतें

ज़मीन में ज़ाहिरी बरकतें जैसे दरख़्त, फ़सलें, नहरें, दरिया और मादनियात हैं; और बातिनी बरकतें यह हैं कि ज़मीन को अंबिया-ए-किराम, औलिया-ए-इज़ाम और सुलहा के मक़द्दस वजूद और आरामगाहों से मुशर्रफ़ फ़रमाया गया, जिससे यह आस्मानों से भी अफ़ज़ल मर्तबा पा गई।

[23] चार दिनों की मुद्दत में तकमील

ज़मीन की पैदाइश दो दिन (इतवार और पीर) में हुई, और पहाड़ों व रिज़्क़ की तक़दीर और बरकतों का निज़ाम अगले दो दिन (मंगल और बुध) में मुकम्मल हुआ; इस तरह कुल चार दिन हुए। इससे मालूम हुआ कि रिज़्क़ का इंतिज़ाम इंसान की पैदाइश से पहले ही मुक़र्रर कर दिया गया था, लिहाज़ा बंदे को रिज़्क़ की तरफ़ से मुतमइन होकर रब की इबादत में लगना चाहिए।

[24] सवाल करने वालों के लिए मुकम्मल जवाब

यह वाज़ेह और हिकमत भरा बयान उन तमाम लोगों के सवाल का तसल्ली-बख़्श जवाब है जो कायनात की तख़्लीक़ और उसकी मुद्दत के बारे में दरयाफ़्त करते हैं।

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