कुरान - 41:8 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

8
إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَٰتِ لَهُمۡ أَجۡرٌ غَيۡرُ مَمۡنُونٖ

Transliteration: (Innal lazeena aamanoo wa 'amilus saalihaati lahum ajrun ghairu mamnoon (section 1))

बेशक जो लोग ईमान लाए और उन्होंने नेक आमाल किए, उनके लिए कभी न ख़त्म होने वाला [16] अज्र है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 8 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 8

बेशक जो लोग ईमान लाए और उन्होंने नेक आमाल किए, उनके लिए कभी न ख़त्म होने वाला [16] अज्र है।

[16] मोमिनीन के लिए बे-इंतिहा और दायमी सवाब

'अज्रुन ग़ैरु मम्नून' से मुराद वह दायमी नेअमत और सवाब है जो कभी ख़त्म नहीं होगा और न ही उसमें कोई कमी आएगी। तफ़सीर ख़ज़ाइनुल इरफ़ान में है कि:

  • जो मोमिन अपनी तंदुरुस्ती और जवानी में पाबंदी से नेक आमाल करता था, फिर बुढ़ापे, बीमारी या मजबूरी की वजह से उन आमाल को न कर सका, अल्लाह तआला अपने फ़ज़्ल से उसके आमाल-नामे में उन तमाम नेकियों का सवाब बदस्तूर जारी फ़रमाता रहता है।
  • सद्क़ा-ए-जारिया, इल्म-ए-दीन और नेक औलाद का सवाब भी मोमिन को क़ब्र में मुसलसल पहुंचता रहता है। यह अल्लाह तआला का अपने बंदों पर अज़ीम लुत्फ़ व करम है।

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